कविता : हमारे राम | Devbhoomi Samachar

कविता : हमारे राम

हमारे राम श्री रघुराम तो करुणा के सागर हैं। उँडेली हर हृदय में भर लबालब प्रेम गागर है। हमारे राम का साम्राज्य तो जन जन क दिल में है, हर एक प्राणी का करने वे यहाँ उद्धार आए हैं।l जो मर्यादा से जी लो तो तुम्हें मिल जाएँगे प्रभु राम। करो रक्षा तुम हर प्राणी का तो तुमको मिलेंगे राम। #सत्यवती आचार्य, चंडीगढ़

चलो खुशियाँ मनाएँ आज हमारे राम आए हैं।
सिया, लक्ष्मण को और हनुमान जी को साथ लाए हैं।
करो न देर अब झट से झुकाओ शीश चरणों पर,
चलो लूटें, बटोरें, ढेर सारा प्यार लाए हैंll

बड़ी लंबी डगर थी और बेसब्री का आलम था।
समय वह था भयावह क्रूर और बेहद ही ज़ालिम था।
मनःस्थिति थी बड़ी व्याकुल,व्यथित था हर हृदय बेकल,
मगर हम सब रुकावट और बाधा लाँघ आए हैं।l

अयोध्या की ये नगरी
इस धरा की इक धरोहर हैl
बनाती इस नगर को इक नदी सरयू मनोहर है।
कभी सरयू के घाटों पर थे खेले राम रघुनंदन,
कई जन्मों के प्रारब्धों ने दर्शन अब कराए हैं।

हमारे राम श्री रघुराम तो करुणा के सागर हैं।
उँडेली हर हृदय में भर लबालब प्रेम गागर है।
हमारे राम का साम्राज्य तो जन जन क दिल में है,
हर एक प्राणी का करने वे यहाँ उद्धार आए हैं।l

कविता : मेरा भारत

जो मर्यादा से जी लो तो तुम्हें मिल जाएँगे प्रभु राम।
करो रक्षा तुम हर प्राणी का तो तुमको मिलेंगे राम।
बनो कर्मठ, कृतज्ञ,हो सत्यनिष्ठ व दृढ़प्रतिज्ञ बनो,
चलो हम सत्य का डंका बजाएँ राम आये हैं।


करो उदघोष भज लो जय सियावर राम जय श्री राम।
कहो प्रभु राम रघुपति
राम जय जय राम जय श्री रामl
जपो श्री राम जय जय राम जय जय राम जय श्री राम।
हो भवसागर से बेड़ा पार
जप लो राम जय जय राम।
भजो श्री राम जय जय राम जय जय राम जय श्री राम।


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