साहित्य लहर

लघुकथा : क्वारिटाइन सर्प

व्यग्र पाण्डे

एक दिन अचानक एक सांप को किसी इंसान ने डस लिया वह त्वरित गति अपने सरदार के पास पहुँचा। सरदार ने पूछा- क्या हुआ तुझे, जो इतना परेशान दिखाई दे रहा है और हांफ सा रहा है?

सांप बोला- सरदार, मुझे इंसान ने डस लिया है, अब आप ही बताओ, मैं क्या करूँ? सरदार ने गंभीर होकर कहा- अरे, ये तो बहुत ही बुरा हुआ तेरे साथ। अब तुझे स्वयं के लिए और दूसरों की भलाई के लिए, कई सप्ताह संपूर्ण सर्प जाति से दूर रहना पड़ेगा। इसलिए अब इसी वक्त यहाँ से किसी अज्ञात स्थान पर चला जा और फालतू में बाहर ना निकलना।

तब से वह सर्प क्वारिटाइन पर चला गया । और ये खबर सब जगह आग की तरह फैल गई। इस कारण सर्प जाति में भय व्याप्त हो गया। अब सर्प स्वयं के शिकार होने के भय से, खुद भी शिकार को नहीं निकलने लगे। देखते हैं उस क्वारिटाइन सर्प की अवधि कब पूरी होती है… और इंसान के डसने का असर सर्प के स्वास्थ्य पर कैसा रहता है ये देखना बाकी है।

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