तारों का टूटना

ओम प्रकाश उनियाल

जी हां! दिल के तारों का टूटना तो सुना था मगर अब तो रोपवे व झूलापुल की तार भी टूटने लगी है। दिल के तारों के टूटने के पीछे किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होती बल्कि कोई इस प्रकार की ठेस, चोट या आघात पहुंचना होता है। रोपवे व झूलापुल की तार टूटना साफ लापरवाही है।

कुछ दिन पूर्व ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला की तार टूटने से जिस प्रकार से पुल से गुजर रहे लोगों में अफरा-तफरी मची थी उसी प्रकार से देवघर में रोपवे की तार टूटने से कई जिंदगियां घंटों आसमान में झूलती रही। झारखंड के देवघर में त्रिकूट पर्वत पर रोपवे का तार अचानक टूट जाने से कई लोगों की जान पर बन आयी।

रोपवे के चालू होते ही टॉप के स्टेशन का रोलर टूट गया जिसके कारण कुछ ट्रॉलियां हवा में लटक गयी। जिनमें सवार लोगों को लगभग 46 घंटे तक एनडीआरएफ, वायुसेना, आईटीबीपी व सेना द्वारा संयुक्त रूप से रेस्क्यू कर बचाया गया। कुछेक की मौत भी हुई एवं घायल भी हुए। वर्ष 2009 में भी इसी प्रकार की घटना यहां घटी थी।

सन् 2019 में जम्मू रोपवे महामाया-बाहु फोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट में रेस्क्यू ट्रॉली टूटी थी। ओवरलोड के कारण। 2013 की आपदा के बाद उत्तराखंड में असी गंगा घाटी के सेकू में लगी ट्रॉली की तार टूटने से दो छात्र नदी में गिर गए थे। 2016 में रायपुर के डोंगरगढ़ के बम्लेश्वरी के मंदिर में पहाड़ी से उतरते समय चक्री का क्लेम टूटने से तार लटकने की घटना घटी थी।

उत्तराखंड के मोरी क्षेत्र में चार साल पहले टौंस नदी के आरपार पिलर से बंधे तार के टूटने से एक युवती नदी में गिर गयी थी। पहाडों में कई इलाकों में नदियां पार करने के लिए ट्रॉली का प्रयोग किया जाता है जो कि तारों पर ही चलती है। ऐसे ही अनेकों झूला पुल जर्जर हालत में हैं। न जाने किसकी तार कब धोखा दे जाए पता नहीं चलता।

क्योंकि तारों की गुणवता सही नहीं होती। इसके बावजूद भी रोपवे, ट्रॉली संचालित करने वाली कंपनियों व प्रशासन द्वारा सबक न लिया जाना बहुत ही चिंताजनक बात है। लापरवही बरतने वाली कंपनियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। ताकि भविष्य में इस प्रकार के हादसे न घटें।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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