पुस्तक समीक्षा : प्रेम भजनावली (द्वितीय संस्करण)

धर्म प्रेमियों के लिए यह पुस्तक अनमोल रत्न है। एक साथ इतनी सामग्री एक ही पुस्तक में मिलना दुर्लभ है। पुस्तक की छपाई, बाईंडिग जहां उत्तम हैं वही दूसरी ओर कागज भी उत्तम क्वालिटी का हैं। श्रीमती प्रेमसखी का प्रयास सराहनीय व वंदनीय हैं। उन्होंने गागर में सागर भरने का प्रयास किया है जो सफल हुआ है।

समीक्षक : सुनील कुमार माथुर जोधपुर
संग्रहकर्ता : — श्रीमती प्रेमसखी
पत्नी स्व ० सुरेश नारायण माथुर, 303 ज्वाला विहार, चौपासनी रोड, जोधपुर

पृष्ठ — 90 , पुस्तक के कवर पेज पर कृष्ण राधा का रंगीन आकर्षक चित्र हैं। अंतिम कवर पेज पर शिव परिवार हैं।‌ कवर पेज के भीतर पांच रंगीन आकर्षक पृष्ठों में गुरूदेव प्रतिभा नन्द जी महाराज, दूसरे पृष्ठ पर स्व ० सुरेश नारायण माथुर जिनकी पावन स्मृति में यह पुस्तक समर्पित की गई है, तीसरे पृष्ठ पर जयपुर के मोती डूंगरी के गजा नन्द जी, पृष्ठ चार पर मां दुर्गा व पांचवें पृष्ठ पर भगवान राम जी विराजमान हैं ‌। इसी तरह अंतिम पृष्ठ के भीतरी पृष्ठ पर दिवंगत विभूतियों में स्व ० श्री हर नारायण माथुर, बद्रीनारायण माथुर, सुश्री पूर्णिमा माथुर व श्रीमती अमर कौर माथुर को शत् शत् नमन हैं।

चार पृष्ठों में अनुक्रमणिका हैं अर्थात किस पृष्ठ पर क्या हैं। नब्बे पृष्ठों की इस पुस्तक में गणेश जी, गुरूदेव, शिवजी, राधा कृष्ण, हनुमानजी, बाबा रामदेव जी, सांईबाबा, अम्बे माता के भजनों के अलावा कपूर आरती, वावा लटियालों व भैरू थारी बीन बाजी जैसे एक से बढकर एक भजनों की शानदार प्रस्तुति की गई है।

इसके अतिरिक्त गजानंद जी, गणगौर, शीतलाष्टमी, रक्षाबंधन की कथाएं, बच्छ बारस की कहानी, बडी तीज की कथा व गोगाजी की कहानी, करवा चौथ की कथा एवं करवा चौथ के व्रत की विधि दी गई है। संग्रहकर्ता श्रीमती प्रेमसखी का प्रयास काफी सराहनीय व वंदनीय हैं। उन्होंने पुस्तक में कहीं भी किसी दिवंगत आत्मा का न तो कोई परिचय दिया हैं और न ही कोई प्राक्कथन या प्रस्तावना दी हैं। उन्होंने सीधे ही बिना किसी भूमिका को बांधे प्रेम भजनावली नामक यह पुस्तक स्व० श्री सुरेश नारायण माथुर की पावन स्मृति में जनता जनार्दन को समर्पित की हैं।‌

धर्म प्रेमियों के लिए यह पुस्तक अनमोल रत्न है। एक साथ इतनी सामग्री एक ही पुस्तक में मिलना दुर्लभ है। पुस्तक की छपाई, बाईंडिग जहां उत्तम हैं वही दूसरी ओर कागज भी उत्तम क्वालिटी का हैं। श्रीमती प्रेमसखी का प्रयास सराहनीय व वंदनीय हैं। उन्होंने गागर में सागर भरने का प्रयास किया है जो सफल हुआ है।

पुस्तक प्राप्ति स्थल

  1. अनिल माथुर, प्रेम भवन, 303 ज्वाला विहार, चौपासनी रोड, जोधपुर, मोबाइल : 9414243589, 9772216161
  2. श्रीमती प्रभा राय, 23 बी — 12 अशोक उद्यान के पास, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर, मोबाइल : 8890307277

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