सम्पादक के नाम खुला पत्र

पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन एक चुनौती

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सुनील कुमार माथुर

एक दिन व्हाटसएप पर एक मेसेज किसी पत्रिका के संपादक ने डाला और लिखा कि आज ई पेपर के जमाने में प्रि़ट मीडिया के समक्ष संकट खडा हो गया है और बुक स्टॉल बंद हो गये हैं । अतः प्रबुद्ध पाठकगण सुझाव दे कि पाठकों को फिर से कैसे प्रि़ट मीडिया से जोडा जायें ।

बस मैंने भी अपने विचार तत्काल लिखकर भेज दिये और अपने सुझाव में लिखा कि जब से ई पेपर की भरमार हुई है तब से प्रिंट मीडिया का अस्तित्व खतरे में पड गया । चूंकि प्रिंट मीडिया में कागज की छपाई , कम्पोजिंग , प्रूफ रीडिंग , प्रिटिंग , पोस्टिंग का कार्य होता हैं जो आज के दौर में काफी मंहगा हो गया है जिसके कारण पत्र पत्रिकाओ की कीमतों में भारी बढोतरी हो गयी । वही आम पाठक की खरीद से दूर हो गयी । नतीजन बुक स्टाल पर से अखबार व पत्रिकाओ का अकाल सा पड गया । लेखकों को जो नि शुल्क प्रति व पारिश्रमिक मिलता था वह बंद हो गया । यही वजह है कि साहित्यकार भी अब प्रिंट मीडिया से दूर होता जा रहा है ।

ई पेपर की भरमार से रचनाएं धडल्ले से प्रकाशित होती है चूंकि संपादक मंडल को कम्पोज किया हुआ मेटर मिलता है जहां हर चीज पक्की पकाई है । बस संपादक मंडल को पाठको को पीडीएफ फाइल बनाकर भेजनी होती है । इतना ही नहीं पाठको को संपादक मंडल की ओर से आनलाईन प्रशस्ति पत्र दिया जाता हैं । जब प्रिंट मीडिया लेखको को सम्मान देना बंद कर दिया तो बुरे दिन आने ही थे। यही वजह हैं कि आज के दौर में अनेक पत्र पत्रिकाओ का प्रकाशन बंद हो गया है व कई बंद होने के कगार पर हैं ।

सुझाव पढकर संपादक मंडल ने विज्ञापन की मांग पर सुझाव मांगें । तब हमने कहा कि स्थानीय पी आर ओ से सरकारी विज्ञापन हेतु संपर्क करें । तब वे कहने लगे कि पी आर ओं फंड नहीं हैं इतना कह इतिश्री कर लेते हैं । अब उन संपादक जी को कौन समझाएं कि पत्र पत्रिकाओ का प्रकाशन आज के दौर में एक चुनौतीभरा कार्य है जो हर किसी के बस की बात नहीं हैं ।

शौकिया पत्रकारिता करना घर फूंक तमाशा देखना है चूंकि आज मिशनरी पत्रकारिता खत्म हो चुकी है व पत्रकारिता एक उधोग एवं व्यापार बन चुकी है । अतः यही वजह हैं कि आज सर्वत्र पीत पत्रकारिता ही दिखाई दे रही हैं न कि मिशनरी पत्रकारिता।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

Devbhoomi
From »

सुनील कुमार माथुर

स्वतंत्र लेखक व पत्रकार

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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