भारतीय संस्कृति से गहरा प्रेम था डॉ. राधाकृष्णन को

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राजीव कुमार झा

हमारे देश में डॉ . सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम यहां के द्वितीय राष्ट्रपति के रूप में सारे संसार में प्रसिद्ध है ! उनका जन्म 5 सितंबर 1888 ई. में यहां तमिलनाडु में हुआ था और इस दिन उनकी स्मृति में सारे देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है! आज 17अप्रैल के दिन 1975 ई. में उनका देहांत हुआ था ! आइये हम उन्हें अपना श्रद्धा सुमन अर्पित करें !

डॉ . राधाकृष्णन दार्शनिक थे और प्राचीन भारतीय धर्म संस्कृति के बारे में उनकी लिखी विद्वतापूर्ण पुस्तकें सारे संसार में प्रसिद्ध हैं ! उन्होंने अंग्रेजी में वेद और उपनिषद् के बारे में पुस्तकों का लेखन किया और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय , वाराणसी में प्राध्यापन किया ! उन्होंने इस विश्वविद्यालय के कुलपति पद को भी सुशोभित किया और देश की आजादी के बाद यहां के प्रथम उपराष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए !

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद के राष्ट्रपति पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भारत गणराज्य के द्वितीय राष्ट्रपति के पद पर आसीन होने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ और इस रूप में उन्होंने देश की बहुमूल्य सेवा की ! वह अत्यंत शालीन विनम्र और मृदुभाषी व्यक्ति थे और रूस में राजदूत के रूप में भी उन्होंने काम किया था !

उन्हें राजनेता के रूप में विश्व शांति का समर्थक माना जाता है और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संसार में शीतयुद्ध की परिस्थितियों से उपजे तनावों को खत्म करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ! भारतीय संस्कृति से उन्हें गहरा प्रेम था और इसकी झलक आजीवन उनके विचारों के अलावा खानपान , वेशभूषा और व्यवहार में दिखाई देती रही !

वह युवाओं और छात्रों को देश की उन्नति के मूल में स्थित देखते थे और शिक्षा में आधुनिकता के साथ पारंपरिक जीवन मूल्यों के समर्थक थे ! उन्हें आज पुण्यतिथि के दिन शत शत नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि !

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