
✍️ सुनील कुमार माथुर
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार, जोधपुर (राजस्थान)
इस नश्वर संसार में आज झूठ का सर्वत्र बोलबाला है। आप जितना अधिक झूठ बोल सकते हैं, बोलते रहिए—कोई आपको रोकने या टोकने वाला नहीं है। यही वजह है कि आज झूठ के आगे सच बोना (दबा) हो गया है। लेकिन इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि हम सच बोलना छोड़ दें। आप बेहिचक होकर सच बोलिए, क्योंकि आखिर में जीत सच्चाई की ही होती है। सत्य, सत्य ही रहता है और झूठ, झूठ ही रहता है। आप सच बोलकर किसी का दिल तोड़ देना, लेकिन झूठ बोलकर किसी का विश्वास मत तोड़ना।
जीवन बदल सकते हैं
वर्तमान समय में हर किसी के चेहरे पर बारह बजे हुए नजर आ रहे हैं। जिसे देखो, वह तनाव में जी रहा है। हर किसी को जल्दी है, लेकिन जाना कहां है—इस बात का पता नहीं है। भला फिर ऐसा जीवन जीना किस काम का है, जहां हर पल, हर क्षण तनाव के बादल छाए रहें। अगर आपका एक हाथ मदद का, एक शब्द सहानुभूति का और एक हंसी परोपकार की किसी को मिल जाए, तो सामने वाले की मनोदशा और जीवन दोनों बदल सकते हैं।
इसलिए जीवन में हर क्षण हंसते-मुस्कुराते रहिए। चूंकि जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। कभी भी समय हमेशा एक-सा नहीं रहता है। अतः स्वस्थ रहें, मस्त रहें। किसी ने बहुत ही अच्छी बात कही है कि—“बोलते हुए होठ समस्या को हल करने में सहायक सिद्ध होते हैं। बंद होठ समस्या को कुछ समय तक के लिए टाल देते हैं और हंसते-मुस्कुराते होठ अनेक समस्याओं का हल एक चुटकी में निकाल देते हैं।”
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जहां मन मिलें, वहीं आनंद है
इंसान आज खुशी व आनंद बाहर खोज रहा है, और इसे पाने के लिए वह इधर-उधर भटक रहा है, जबकि आनंद व खुशी दोनों उसके भीतर ही विराजमान हैं। लेकिन अपने घमंड और अहंकार के कारण वह इन्हें देख नहीं पा रहा है, महसूस नहीं कर पा रहा है। लोगों की यह गलत धारणा बन गई है कि आनंद वहां है जहां धन है, और यही वजह है कि वह दिन-रात धन के पीछे भाग रहा है।
कितना भी कमा लो, मगर वह हर बार कम ही दिखाई देता है। बस धन-दौलत के पीछे भागते-भागते वह पगला गया है। जबकि हकीकत यह है कि आनंद वहां है, जहां हमारा मन किसी से मिलता है। धन से आनंद नहीं मिलता है, अपितु धन से तो मात्र इच्छाओं की पूर्ति हो सकती है।








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