त्योहरों की परम्पराओं को बनाएं रखें

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सुनील कुमार माथुर

भारत पर्वो एवं त्योहरों का देश हैं चूंकि यहां विभिन्न जाति व धर्मो के लोग निवास करते हैं और यही कारण है कि हमारा देश कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक है और यहां विविधता में भी एकता दिखाई देती है चूंकि सभी जाति व धर्म के लोग एक दूसरे के तीज त्योहार में सरीक होकर बधाइयां और शुभकामनाएं देते हैं ।

दीपावली दीपो का त्यौहार है और इसका आनंद तभी आता हैं जब हम दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाकर अपने अपने घरों पर रोशनी करे लेकिन आज दीपक का स्थान लाइटों की लडियों ने ले लिया हैं । इसका मूल कारण यह हैं कि हम आधुनिकता के नाम पर अपनी परम्पराओं से दूर होते जा रहे हैं । हम दिनों दिन आलसी हो रहें हैं । दियो में तेल कौन डाले । कोन उन्हें उठाए । कौन दिया की बती को ऊपर करें ।

यही हाल अन्य वस्तुओं का हैं । लक्ष्मी जी के पगलिए , रंगोली , पकवान व मिठाई का है । आज कि महिलाऐं हर चीज बाजार से खरीद रही हैऔर फिजूल में पैसे की बर्बादी कर रही है । हम अभी कोराना महमारी का दंश देखा है । उस दर्द को हम भूल भी नहीं पाए है और दीपकों का त्यौहार दीपावली आ गई है । कोरोना महमारी का प्रकोप जरुर कम हुआ है लेकिन पूरी तरह से खत्म नही । अत: अपने स्वास्थ्य व परिवार के सद्स्यों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए बाजार से बने बनाए पकवानो , मिष्ठान व अन्य प्रकार की खान सामग्री खरीदने सच्चे से बचे अन्यथा घर बैठे बीमारी को नोता देगे ।

आलस्य से बचे और अपने घरों में ही पकवान , मिष्ठान बनाए और अपने हुनर से परिवार वालों को अवगत करा कर वाह वाह लूटे । अपनी पाक कला का हुनर दिखाईए । घर एक दूसरे के मेहंदी लगाइए । मांडने मांडिए । दीपक सजाइए । दीपावली का आनन्द तो दीपकों की रोशनी में ही है ।

व्यर्थ का लोक दिखावा करके अपनी परम्पराओं को मत भूलिए । बच्चे जैसा देखेगे वैसा ही तो सीखेगे । घर के सभी सदस्य कमाते हैं तो इसका मतलब यह तो नहीं की हम अपनी परम्पराओं को ही भूल जायें । आइए और इस दीपावली संकल्प लिजिए कि हर तीज – त्यौहार पर घर में ही स्वादिष्ट व्यंजन अपने हाथों बनाकर सबके साथ आनंद लेगे । दीपक जलाकर ही रोशनी करेगे और फिर से पुरानी परम्पराओं को अपना कर एक नई शुरुआत करेगे।

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