बीमा का पैसा हड़़पने के लिए मां को उतार दिया मौत के घाट

जय सिंह ने सुनारी गांव में फोन कर भाभी प्रभा के बारे में पूछा। जहां से पता लगा कि प्रभा मायके आई ही नहीं है। सुबह छह बजे सीढ़ी का दरवाजा खोलकर हिमांशू से पूछताछ के लिए सभी पहुंचे, तो वह नहीं था। पड़ोसी की छत के रास्ते वह भाग गया था। कुछ लोगों ने बताया कि हिमांशू को मंगलवार को ट्रैक्टर से जाते देखा था।

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में जेवर और बीमा का 55 लाख रुपये हथियाने के लिए जल्लाद बेटे ने अपनी ही मां की गला घोंटकर मौत के उतार दिया।शव को यमुना नदी के किनारे बने टीले के पीछे फेंक दिया।ग्रामीणों की खोजबीन में शव मिला। पिता ने बेटे की संदिग्ध हरकतों के आधार पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बेटा घर से भाग गया है।वारदात में दो अन्य लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।

जिले के धाता थाना क्षेत्र के अढौली के रोशन सिंह पटेल मंगलवार सुबह चित्रकूट,राजापुर हनुमान मंदिर दर्शन करने गए थे।रोशन दोपहर लगभग एक बजे घर लौटकर आए।घर पर 49 वर्षीय पत्नी प्रभा देवी के नहीं मिलने पर 23 वर्षीय बेटे हिमांशू से पूछा।हिमांशू ने बताया कि मां नाना की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देखने सुनारी गांव गई हैं।

रोशन ने बताया कि शाम को करीब साढ़े छह बजे हिमांशू ने खाना बनाया।कुछ देर बाद वह खेत में पानी लगाने की बात कहकर घर से निकला। देर रात खेत से लौटने के बाद सोने चला गया।रात करीब दो बजे आहट पर उनकी नींद खुली, तो चारपाई के बगल में लोहे की रॉड और धारदार बांका पड़ा था। इस दौरान घर के सारे दरवाजा खुले होने पर वह चोर की आशंका पर छत पर पहुंचे, तो वहां हिमांशू मौजूद था। हिमांशू के तेवर देख घबराकर रोशन ने सीढ़ियों का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

रोशन ने बताया कि शंका होने पर भूसे की कोठरी में जाकर देख, तो वहां घसीटने के निशान बने थे। भूसे में पत्नी की चप्पल पड़ी देखी। दहशत में वह पूजा घर में छिप गए। बताया कि उनके फोन से सारे नंबर भी हटा दिए थे, इससे वह किसी से संपर्क भी नहीं कर सके।बुधवार तड़के करीब चार बजे पड़ोसी चचेरे भाई जय सिंह का दरवाजा खुलने पर वह उसके पास पहुंचे और आपबीती बताई।

जय सिंह ने सुनारी गांव में फोन कर भाभी प्रभा के बारे में पूछा। जहां से पता लगा कि प्रभा मायके आई ही नहीं है। सुबह छह बजे सीढ़ी का दरवाजा खोलकर हिमांशू से पूछताछ के लिए सभी पहुंचे, तो वह नहीं था। पड़ोसी की छत के रास्ते वह भाग गया था। कुछ लोगों ने बताया कि हिमांशू को मंगलवार को ट्रैक्टर से जाते देखा था। परिजनों को पता चला कि ऐरई गांव में नदी के किनारे टीले पर एक महिला का शव पड़ा है।परिजनों ने जाकर देखा, तो बोरे में शव प्रभा का भरा था।

एएसपी ने बताया कि पिता के अनुसार बीमा पॉलिसी के 55 लाख रुपये पाने के लिए बेटे ने मां की हत्या की है। पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर हत्यारोपी बेटे की तलाश की जा रही है। पुलिस ने वारदात में दो अन्य लोगों के शामिल होने का अंदेशा भी जताया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है।

मां के बाद पिता की हत्या में बेटे के हाथ कांप गए।शायद यही वजह रही कि रोशन सिंह पटेल जिंदा है। जल्लाद बेटा योजना के तहत पिता को मारने के इरादे से उनकी चारपाई तक पहुंचा था। उस समय रोशन गहरी नींद में सो रहे थे। उसके पास पूरा मौका था।हिमांशू जुआरी बताया जाता है। हिमांशू ऑनलाइन सट्टा, जुआ खेलता था। हिमांशू कई लोगों से बैंक लोन के नाम पर कर्ज भी ले रखा था।

कर्ज के चक्कर में तीन दिन पहले हिमांशू मां के कमरे से 15 लाख के सोने के जेवरात और एक किलो चांदी भी चोरी की थी। जेवरात चोरी करने का पता चलने पर सोमवार को पिता ने फटकारा था और जेवरात लाने की बात कही थी। इस दौरान किसी से मोबाइल पर हिमांशू ने पिता की बात कराई थी। मोबाइल पर बात करने वाले शख्स ने बोला था कि जेवरात लौटा देगा। जेवर के चक्कर से हिमांशू तनाव में था।मां भी जेवरात के लिए दबाव बना रही थी।

हिमांशू ने मां की हत्या के बाद शव को भूसे की प्लॉस्टिक बोरे में भरा था। उसे मालूम था कि करीब एक बजे के आसपास पिता राजापुर से लौट आएगें। इसी वजह से मंगलवार सुबह ही हत्या कर दी। उसने आनन-फानन ट्रैक्टर ट्रॉली में शव का बोरा रखा और नदी के किनारे छिपाकर भाग आया था। मां की हत्या का पिता से राज खुलने का डर था। हिमांशू नदी में शव फेंकना चाहता था। दो साथियों संग शाम लगभग पांच बजे हिमांशू मोटरसाइकिल से पहुंचा था।

नदी के किनारे शवदाह का निर्माण हो रहा है। निर्माण सामग्री की सुरक्षा के लिए वहां चौकीदार झोपड़ी बनाकर रहता है। चौकीदार ने तीनों को टोंका था और दोबारा न आने को भी बोला था। इसी वजह से हिमांशू बारिश में खेत पर पानी लगाने के बहाने फिर घर से निकला था।रात लगभग 11 बजे हिमांशू मोटरसाइकिल से साथियों के साथ शव को ठिकाने लगाने टीले पर गया था। चौकीदार ने पुलिस को बताया कि रात को मोटरबाइक सवार उसे झोपड़ी में देखकर भाग निकले थे। पुलिस हिमांशू के साथ रहने वाले दोस्तों की भी तलाश में जुटी है।

ट्रैक्टर ट्रॉली से शव का बोरा उतारकर टीले पर रखने के बाद हिमांशू लौट रहा था। टीले से कुछ दूरी पर चरवाहे बकरी चरा रहे थे। एक चरवाहे ने हिमांशू से बोरे के बारे में भी पूछा था। कबाड़ का बोरा बताकर हिमांशू चला गया था। चरवाहा कुछ समय बीतने के बाद बोरे के पास पहुंचा। उसने बोरे के बंधन की ओर टटोला। किसी का शव होने का उसे अहसास हुआ। इसके बाद उसने शव महिला या फिर पुरुष का है, यह जानने के लिए पैरों को छूकर भी देखा था। पैर में बिछिया, पायल होने से महिला का शव जानकर वह अपने गांव ऐरई लौट गया। पूरे गांव में चर्चा फैलने के बाद भी पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

हिमांशू की उम्र 23 से 24 साल के आसपास है।हिमांशू के दिमाग में साजिश दो माह से चल रही थी। साजिश के तहत पिता और मां को बीमा के लिए प्रेरित किया था।हिमांशू ने पिता की एक पॉलिसी दिसंबर माह में 30 लाख व दूसरी फरवरी माह में 25 लाख की ली थी। हिमांशू ने मां की बीमा पॉलिसी कराई थी। मां की पॉलिसी के कागज हिमांशू ने अपने पास ही रखे थे। पॉलिसी में नॉमिनी हिमांशू ही था।

मृतका प्रभा के दो बेटे अंकुर और हिमांशू हैं। छोटा हिमांशू मां और पिता के साथ रहता था। बड़े बेटे अंकुर को मृतका के सेवानिवृत्त फौजी जेठ लाल सिंह ने गोद ले रखा था। जेठ लाल सिंह प्रयागराज में रहते हैं।जेठ लाल के कोई संतान नहीं है। हिमांशू के चुराए जेवरातों में अंकुर भी हिस्सेदार था।


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