मां ममता की मूरत होती है… | Devbhoomi Samachar

मां ममता की मूरत होती है…

मां ममता की मूरत होती है… तभी तो तू एक नारी होकर एक अबोध कन्या पर जुल्म ढा दिया। उसे कूडे के ढेर में फैंक कर तू मां की ममता, दया व करूणा को भी लज्जित कर दिया… जोधपुर (राजस्थान) से सुनील कुमार माथुर की कलम से…

मां ममता की मूरत होती है... तभी तो तू एक नारी होकर एक अबोध कन्या पर जुल्म ढा दिया। उसे कूडे के ढेर में फैंक कर तू मां की ममता, दया व करूणा को भी लज्जित कर दिया... जोधपुर (राजस्थान) से सुनील कुमार माथुर की कलम से... हे मां… मैंने सुना है कि मां ममता की मूरत होती है। दया, करुणा, ममता, वात्सल्य की सागर होती है। हर मां ऐसी ही होती हैं। यह भी मैं जानता हूं। मां जीवनदायिनी होती हैं। मां… मैंने बच्चपन में मां के बारे में बहुत कुछ सुना हैं। अगर मां पर एक आलेख लिखने बैठू तो न जाने कितने पृष्ठ रंगने पडे और तोज्ञतो और मां के बारे में लिखते समय शायद शब्द भी कम पड जाये।

मां कि महिमा अपरम्पार है लेकिन मां एक तुम हो जो बडी ही निर्दयी हो। मुझ अबोध बच्ची को जन्मते ही तूने कचरे के ढेर में डाल दिया। मां… तेरी क्या मजबूरियां रही, यह मैं नहीं जानती। लेकिन तूने मुझे कूडे के ढेर में फैंक कर यह साबित कर दिया कि अन्याय, अत्याचार व व्यभिचार के खिलाफ आवाज उठाने की तुझ में ताकत नहीं हैं।

तभी तो तू एक नारी होकर एक अबोध कन्या पर जुल्म ढा दिया। उसे कूडे के ढेर में फैंक कर तू मां की ममता, दया व करूणा को भी लज्जित कर दिया हे मां। तू कैसी निर्दयी मां हैं । तुझे मां कहते हुए भी मुझे शर्म आ रही है। मां, मैं नहीं जानती की मेरा क्या दोष है। लेकिन इतना समझ गयी कि इस सभ्य कहे जाने वाले समाज में कन्या का जन्म लेना ही पाप हो गया है।

मां की कोख से लेकर जब तक उसे जीना हैं तब तक कदम दर कदम उसे जुल्म ही सहना है। अगर कोई कन्या अन्याय व अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाती है तो भी समाज उस पर नाना प्रकार की टिप्पणियां करता हैं। यह कैसा सभ्य समाज हैं ॽ

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मां ममता की मूरत होती है... तभी तो तू एक नारी होकर एक अबोध कन्या पर जुल्म ढा दिया। उसे कूडे के ढेर में फैंक कर तू मां की ममता, दया व करूणा को भी लज्जित कर दिया... जोधपुर (राजस्थान) से सुनील कुमार माथुर की कलम से...

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