दुःखों का सागर

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सुनील कुमार माथुर

यह संसार तो एक दुखों का सागर हैं । यहां हताशा व निराशा के सिवाय कुछ भी नहीं है । चूंकि इंसान भौतिक सुख सुविधाओं के भंवर जाल में फंस जाता हैं और एक इच्छा की पूर्ति हो भी नहीं पाती हैं कि दूसरी इच्छा जागृत हो जाती हैं । वह अपनी इच्छाओं के चक्कर में मूल ध्येय को भूल ही जाता हैं । कमियां हर किसी में होती हैं और हम सभी को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं लेकिन ईश्वर को उसकी भक्ति करके अवश्य ही संतुष्ट कर सकते हैं।

हमें जीवन की असफलताओं से हताश व निराश नहीं होना चाहिए अपितु असफलताओं से सीख लेकर फिर से सफलता की ओर बढना चाहिए । सफलता अवश्य ही मिलेगी । जीवन में कभी भी सफलता हासिल करके अंहकार व घमंड नहीं करना चाहिए । बस लगन , ईमानदारी व मैहनत से आगे बढें तभी समाज में आपकी कद्र होगी । कहते हैं कि जो व्यक्ति समय की कद्र करता हैं समय भी उसकी कद्र करता हैं । अतः जीवन में कभी भी समय की अनदेखी न करे , क्योंकि हर समय एक सा नहीं होता हैं।

अपने धन को धर्म से जोडिये । दान – पुण्य कीजिए । चूंकि यह संसार तो दुखों का सागर हैं । इसलिए व्यक्ति को अपना मन इस नश्वर संसार में न लगाकर ईश्वर की भक्ति में लगाना चाहिए । दीन दुखियों की सेवा करना भी प्रभु की सेवा करना ही कहा जाता हैं । जो अपना समय परोपकार के कार्य में लगाता हैं ईश्वर उसकी मदद अवश्य ही करता हैं।

आज यह कैसी विडम्बना है कि लोग युवापीढ़ी से महापुरुषों के जीवन से एवं महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग व बलिदान से प्रेरणा लेने का आव्हान करते हैं लेकिन वे यह नहीं बताते हैं कि उनका जीवन कैसा था । मात्र एक लाईन का वाक्य बोलकर इतिश्री कर लेते हैं । इससे पता चलता हैं कि हमारे वक्ता महोदय भी उस महान् विभूति के बारें में अनभिज्ञ हैं । इसलिए युवापीढ़ी के अलावा बडे लोगों को भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए । सीखने-सिखाने की कोई उम्र नहीं होती हैं अपितु हर आयु में कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए।

किसी भी अच्छाई के बारे में केवल जानकारी ही पर्याप्त नहीं है अपितु उसे जीवन में भी आत्मसात करना चाहिए । अन्यथा यह बातें केवल किताबों तक ही रह जायेगी । जीवन में कभी भी खुदगर्ज न बनें अपितु दूसरों की खुशियों में ही अपनी खुशियां ढूंढे । इसी में हमारी भलाई हैं समझदारी हैं  सदैव कंधे से कंधा मिलाकर चलें  , सकारात्मक सोच रखें और आगें बढें ।

हम किसी को बदल नहीं सकते लेकिन हर व्यक्ति अपने आपको बदल ले तो हर व्यक्ति एक अच्छा इंसान बन जायेगा और देश स्वतः ही एक अच्छा राष्ट्र बन जायेगा । दूसरों को बदलने के चक्कर में अपना समय बर्बाद न करें । कहते हैं कि आप भले तो जग भला और आप बुरे तो जग बुरा । इस नश्वर संसार में कभी भी किसी की टांग खिंचाई न करे अपितु जो सही कार्य करें उसे प्रोत्साहित अवश्य करें। धन्यवाद दीजिए, शाबाशी दीजिए। किसी पर भी अपनी सोच व विचारधारा को थोपने का प्रयास न करें।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

Devbhoomi
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सुनील कुमार माथुर

लेखक एवं कवि

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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