आदर्श जीवन व मानवीय मूल्य

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सुनील कुमार माथुर

व्यक्ति को हमेशा ईश्वर में विश्वास , श्रद्धा और आस्था रखनी चाहिए । चूंकि वहीं हमारा पालनहार है । जीवन जीओं शान से और पानी पाओ छान के । जहां तक हो हमेशा सद् कर्म करें और किसी की चुगली या बुराई न करें । इस नश्वर संसार में तो कदम-कदम पर भ्रष्टाचार हैं , पीडा हैं , दुख हैं , परेशानियां है व उलझनें है लेकिन इंसान को इससे घबराना नहीं चाहिए अपितु आत्मविश्वास के साथ साहस जुटाकर समस्या का हल निकालना चाहिए ।

काम , क्रोध , अंहकार , ईर्ष्या , लोभ लालच, आलस्य ये सब हमारे शत्रु है अतः इनसे बचकर रहें । क्रोध व अंहकार में व्यक्ति को कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए कि बाद में पछताना पडें । रात के बाद दिन व दिन के बाद रात आती ही हैं ठीक उसी प्रकार दुःख के बाद सुख व सुख के बाद दुःख आता हैं । हर वक्त परिस्थिति एक जैसी नहीं होती हैं । अतः व्यक्ति को हर परिस्थिति में विनम्रता के साथ रहना चाहिए ।

अगर जीवन में कुछ नया सिखने की ललक हो तो पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ सुचारू रूप से सिखना चाहिए । सफलता अवश्य ही मिलेगी । हर वक्त समस्याओं को देखकर घबराना नहीं चाहिए अपितु दृढता के साथ समस्या का समाधान खोजना चाहिए । जीवन में जो मेहनत करते हैं उन्हें सफलता अवश्य ही मिलती हैं इसमें कोई दो राय नहीं है ।

काम , क्रोध , अंहकार , ईर्ष्या , लोभ लालच ये हमारे सबसे बडे शत्रु है अतः इनसे बचकर रहें । अन्यथा ये हमें पतन के गर्त में डाल देंगे । ये शत्रु हमारी सकारात्मक सोच व प्रगति के मार्ग पर बडे शत्रु है । प्रगति के पथ पर रोडे हैं । अतः जीवन में कभी भी हताश न हो और सकारात्मक सोच के साथ आगें बढें । जीवन में हमेशा हंसते मुस्कुराते रहिए । प्रेम , करूणा , दया , ममता व वात्सल्य व नम्रता जैसे पुष्पों की वर्षा करते रहिए । आपका जीवन चंदन की खुश्बू की भांति महक उठेगा । परिवार , समाज व राष्ट्र में आपके आदर्श व्यक्तित्व की महक सर्वत्र छा जायेगी । बस मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में बनायें रखें ।

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