लगातार पानी और हवा बनी “किसानों के लिए मुसीबत”

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संवाददाता अशोक शर्मा

गया, बिहार। लगातार पानी और हवा किसानों के लिए बना मुसीबत , कई एकड़ में लहलहा रहे धान की फसल हुआ बर्बाद सरकार से मुवावजा की गुहार लगा रहे किसान , कुदरत का कहर से किसान औधे मुह गिरे लाखो का धान का फसल हुआ बर्बाद। हमारा देश भारत है और किसान इस देश का रीढ़ होते है जिसके सहारे अर्थव्यवस्था टिकी हुई है और जो देश मे मौजूद 130 करोड़ लोगों के लिए भोजन पैदा करती है एक ओर जहां सरकार किसानों के लिए हर समय मदद को प्रतिबद्ध है तो वही दुसरी ओर कूदरत का कहर से किसान त्राहिमाम कर रहे है लेकिन अब करे तो क्या करे कहावत है कुदरत के सामने कोई बलवान नही होता ।

हे भगवान ई का गति हमनी के साथ कइल$अ कैसे बाल बच्चा के पढईबय और पोसबै सभे धनवा बर्बाद हो गेलई – पीड़ित किसान…

मामला बाराचट्टी विधानसभा अंतर्गत मोहनपुर प्रखंड के मुसरशब्दा गावँ का जहां के किसान काफी हताहत हो गए इसकी वजह है लगातार बिहार में बेमौसम बारिश और हवा और ये केवल बाराचट्टी में ही नही पूरे बिहार में किसानों को क्षति हुई है किसानों में दिलचंद प्रसाद जो कि पेसे से किसान है मायूस हो कर बताते है की सब बर्बाद हो गेलो बाबू ब केकरा कोची बतइयो कोन हमनी के सुनतो आगे बताते है हम छोटे किसान है।

इस कमर तोड़ मंहगाई में बीज, तेल, खाद आदि संबंधित धान सामग्री सारा चीज महंगा खरीदकर 6 एकड़ अपना जमीन और 2 एकड़ दूसरे की जमीन को लीज पर लेकर धान लगाया था लेकिन सब बर्बाद हो गया हमारे दो लड़के एवं एक लड़की है साथ मे एक छोटा भाई है जो हमारे किसानी में पूर्ण रूप से सहयोग करता है हमारे तीनो बच्चे अभी पढ़ते है कहाँ से उनलोगों का फीस दे पाएंगे अब तो साल भर खाने के लिए सोचना पड़ेगा पढ़ाना तो दूर की बात है साथ मे एक बहन भी रहती है।

जिसको हमने शादी किये थे लड़ाई झगड़े के कारण यही रहती है वहां उसके परिवार वाले से नही बनता है इसलिये यही रहती है कुल परिवार का भार हमहि अकेले देखते है लेकिन अब हमारे मेहनत पर भगवान ने मुसीवत का पहाड़ खड़ा कर दिए मेरा धान का फसल पूरी तरह से तैयार था बस कुछ ही दिनों के बाद इसको काट कर बाज़ार में बेचते जिससे रोजी रोटी का कुछ जुगाड़ हो पाता दिलचंद प्रसाद आगे बताते हुए मयूश होते हुए कहते है बाबू जेकरा पिछले तीन महीने से प्रतिदिन खाद पानी दिया इस महगाई के दौर में और एक झटके में सब खत्म हो गया पूरे खेत मे लहलहाते धान के फसल गिर गए है।

जिसको अब काटा भी नही जा सकता और बीज में पानी घुसने से खराब हो गया पूरी तरह से और अभी भी लगातार पानी से धान की पत्तो को सहेजा नही जा सकता ताकि जानवरों को भी खिलाया जाय साथ ही जब उनसे पूछा कि आपको प्रधान मंत्री के द्वारा किसान सम्मान निधि योजना से एक वर्ष में जो तीन किश्त में 6000 रु दिया जाता है ओ तो मिल रहा है लेकिन उससे क्या होगा लाखो रुपया का धान एक झटके में हवाओ के झोंके के धान के फसल को जमीन पर गिरा दिया और पानी में डूबने से फसल सड़ कर खराब हो गया।

दिलचंद प्रसाद एवं समाजसेवी मनोज कुशवाहा जी बताते है फसल बर्बाद होने के कारण कोहवारी जंगल से आया हुआ पानी है जो प्रत्येक वर्ष लाखों का धान एवं अन्य उपजाऊ फसल को बर्बाद कर देता है इसका समाधान निकालने की जरूरत है जिससे किसान को नुकसान न हो।

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