किसान दिवस : शपथ लें किसान खुद कमजोर क्यों पड़े? | Devbhoomi Samachar

किसान दिवस : शपथ लें किसान खुद कमजोर क्यों पड़े?

ओम प्रकाश उनियाल (स्वतंत्र पत्रकार)

भारत कृषि प्रधान देश है। इस धरती पर जो भी पैदावर होती है वह किसान की कड़ी मेहनत का फल ही तो है। किसान यदि जी-तोड़ मेहनत न करता तो देश में भुखमरी का आलम होता है। हर मौसम की मार और तमाम तरह की आपदाएं झेलता हुआ किसान खेती के प्रति समर्पित रहता है।

उसी की मेहनत से धरती सोना उगलती है। इतनी मेहनत करने के बावजूद भी वह फटेहाल जीवन निर्वाह करता है। अनेक विपरीत परिस्थियों से गुजरता हुआ वह औरों का पेट भरने में सक्षम रहता है। 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के हित के लिए सदैव संघर्षरत रहे किसान नेता चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन मनाया जाता है।

चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों के हितार्थ कई कल्याणकारी योजनाएं एवं नीतियां शुरु की । सन् 2001 में सरकार ने उनकी जयंती को ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। तब से हर साल यह दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य किसान को भी समाज में सम्मान दिलाना है।

उनकी समस्याओं से परिचित होना और समस्याओं का हल खोजना है। उसका दु:ख-दर्द बांटना है। उन्हें एकसूत्र में बांधना है। वह भी तो हमारे समाज का अभिन्न अंग है। अक्सर हमारा समाज किसान को छोटा समझता है जबकि उसकी सोच कितनी बड़ी है हम यह भूल जाते हैं।

किसानों ने जिस तरह एक साल तक कृषि के तीन काले कानून रद्द करने को लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया उससे किसानों का सम्मान बड़ा है। हालांकि, कई किसान आज भी बहुत ही गरीबी में जी रहे हैं, कर्ज में डूबे हुए हैं, फलस्वरूप आत्महत्या करने जैसे कदम उठाने को मजबूर होते हैं ऐसा करने से उसका परिवार बिखर जाता है। इससे उसे बचना है।

इस दिन किसान को शपथ लेनी चाहिए कि जो औरों को अन्न उपलब्ध करा रहा है वह भा खुद कमजोर क्यों पड़े? इससे इस दिवस की सार्थकता और अधिक बढ़ जाएगी।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

Address »
कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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