कलम और कागज

इसलिए संतान और विधार्थियों को आपने माता-पिता और गुरुजनों का कभी भी न तो अपमान करना चाहिए और न ही कोई ऐसा काम करना चाहिए जिससे उनकी छवि धूमिल हो।‌हमें भी उच्च पद व प्रतिष्ठा प्राप्त कर कलम व कागज की तरह मिलकर एक आदर्श राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

कलम के बिना कोरे कागज का कोई महत्व नहीं है और कागज के बिना कलम का कोई औचित्य नहीं है कलम और कागज के बिना शब्दों का और लेखन का कोई औचित्य नहीं है। सभी एक-दूसरे पर निर्भर है। जिस प्रकार कलम और कागज एक दूसरे के बिना अधूरे हैं, ठीक उसी तरह से यह मानव जीवन भी कलम और कागज की तरह है जहां हमारे अभिभावक, गुरुजन, बडे बुजुर्ग कलम बनकर हमें आदर्श संस्कार देते हैं और हम कोरे कागज की तरह है और बड़े बुजुर्ग हमें अपने जीवन के अनुभव बतलाकर व आदर्श संस्कार देकर हमारे जीवन को महकाते हैं चूंकि वे हमारे सच्चे शुभ चिंतक है।

अगर वे न हो तो हमारे जीवन का कोई अस्तित्व नहीं है। हम एक कोरे कागज के समान है लेकिन वे हमारे जीवन पर या जीवन पर कुछ लिखते तो नहीं है फिर भी कलम बनकर हमारे व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका अदा करते हैं।‌ कलम कागज हैं तो शब्दों को कागज पर लिखकर कागज को मूल्यवान बनाया जा सकता है लिखा होने से कागज अधिक उपयोगी हो जाता हैं। जब कलम पर सुन्दर लिखावट से कुछ लिखा जाता है तब कागज के सौन्दर्य में चार चांद लग जाते हैं। ठीक उसी प्रकार हमारे गुरुजन, अभिभावक व बडे बुजुर्ग हमें आदर्श संस्कार, व्यवहारिक ज्ञान देकर हमें देश का एक आदर्श, योग्य व अनुभवी नागरिक बनाते हैं जिसके कारण हम अपनी मंजिल को सफलतापूर्वक हासिल करते हैं।

वे सदैव हमारे हित व कल्याण के लिए ही सोचते हैं और वे कभी हमें थप्पड़ भी मारते है तो हमारी भलाई के लिए ही मारते हैं। चूंकि उनको हमारे से कोई दुश्मनी नहीं है। हमारे माता-पिता और गुरुजन ही ऐसे व्यक्ति हैं जो यह चाहते हैं कि उनकी संतान और शिष्य उनसे भी अधिक प्रगति करे और समाज में ही नहीं अपितु विश्व भर में अपना व देश का नाम गौरवान्वित करे। वे उच्च शिक्षा, पद प्रतिष्ठा प्राप्त करें और आपकी खुशी, उन्नति व प्रगति में उनकी खुशी हैं।

इसलिए संतान और विधार्थियों को आपने माता-पिता और गुरुजनों का कभी भी न तो अपमान करना चाहिए और न ही कोई ऐसा काम करना चाहिए जिससे उनकी छवि धूमिल हो।‌हमें भी उच्च पद व प्रतिष्ठा प्राप्त कर कलम व कागज की तरह मिलकर एक आदर्श राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए। जब कलम शब्दों के संग कागज पर चलती है तो शब्द रचना से एक उत्तम आलेख व रचना का निर्माण होता है, ठीक उसी प्रकार हम अपने गुरुजनों व अभिभावकों का मार्गदर्शन पाकर एक श्रेष्ठ भारत का नव निर्माण करें। जहां की जनता में देशभक्ति की भावना का अपार संचार हो।


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