नशा इंसान का सबसे बडा शत्रु | Devbhoomi Samachar

नशा इंसान का सबसे बडा शत्रु

जहां सेवा हैं, धर्म-कर्म हैं, आदर्श संस्कार हैं व्यक्ति को ज्ञानवान, चरित्रवान और संस्कारवान बनाने वाली शिक्षा हो वही तो स्वर्ग हैं। अत जीवन में मानवीय मूल्यों की रक्षा करे और आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ जीवन व्यतीत करें। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

नशा किसी भी प्रकार का क्यों न हो, वह इंसान का सबसे बडा शत्रु होता है। वह चाहे मादक पदार्थो का नशा हो या धन दौलत, पद प्रतिष्ठा, या सता का ही क्यों न हो। भले ही हम इस नश्वर संसार में इस नशे में डूब कर कुछ भी कर ले लेकिन यह नशा उस इंसान को भीतर से कमजोर बना देता हैं। जब उक्त प्रकार के नशे का खुमार उतरता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। जिन्हें कल तक हम अपना समझ रहे थे वे ही आज पराये हो गये।

चूंकि पद प्रतिष्ठा, सता सुख, नशीले पदार्थों का शौक रखना बहुत मंहगा शौक है। जब तक हराम का है तभी तक अच्छा लगता है और जब पैसा कठिन कमाई का लगता है तब ही पता चलता है कि हर प्रकार का नशा इंसान को बर्बाद ही करता हैं। नशा इंसान को इतना गिरा देता हैं कि वह पद की गरिमा तक को भूल जाता हैं।‌ उसे भी ताक पर रख देता हैं और सेवा के नाम पर जना जनार्दन के जीवन से खिलवाड़ करते हैं।‌जनता की परेशानियों को वे अनदेखा कर हर वक्त अपने स्वार्थ की ही सोचते हैं।

सरकारी धन का जमकर फायदा उठाया जाता हैं और सरकारी धन को जमकर लूटने में कोई कसर नहीं छोडते हैं। सत्ता व पद के नशे में इंसान इतना पगला गया है कि वे इस नशे की लत में किसी को भी कुछ भी नहीं समझते। जब सता व पद प्रतिष्ठा का यह नशा टूटता है तभी उन्हें असलियत का पता चलता हैं लाचार, बेबस होकर वे फिर से अपनी असली औकात में आ जाते हैं।‌ तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

यह वक्त हैं सेवा करने का। सता, पद प्रतिष्ठा व धन दौलत का नशा छोड़िए और जनता-जनार्दन की निस्वार्थ भाव से सेवा कीजिए। सेवा करने में जो आनंद है, वैसा आनन्द अन्यत्र दुर्लभ है। परोपकार व नेक कार्य कर जन जन के प्रिय बनें। सता व पद पाकर मानव कल्याण के कार्य कीजिए। अंहकार का त्याग कीजिए और समर्पित भाव से राष्ट्र की सेवा कीजिए। सेवा, परोपकार, धैर्य, त्याग, सहनशीलता और समर्पण जैसे भावों से ही जीवन कंचन की तरह चमकता है।

जहां सेवा हैं, धर्म-कर्म हैं, आदर्श संस्कार हैं व्यक्ति को ज्ञानवान, चरित्रवान और संस्कारवान बनाने वाली शिक्षा हो वही तो स्वर्ग हैं। अत जीवन में मानवीय मूल्यों की रक्षा करे और आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ जीवन व्यतीत करें।


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