कविता : संस्कारों की पाठशाला | Devbhoomi Samachar

कविता : संस्कारों की पाठशाला

आदर्श जीवन जीने की कला हैं संस्कार हैं तो प्रेम व माधुर्य हैं संस्कार हैं तो गरिमामय जीवन हैं संस्कार हैं तो जीवन खुशहाल हैं जहां आदर्श संस्कारों का अभाव है वहीं हिंसा का ताण्डव हैं. #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

धर्म स्थलों की साफ-सफाई करना
भण्डारा कर भूखों को भोजन कराना
शिक्षण संस्थानों में निशुल्क शिक्षा देना
परोपकार के कृत्य करना
यह संस्कारों की पाठशाला है

संस्कार अपने से बडों के चरण स्पर्श करने से
जीव जन्तुओं की रक्षा करने से
हरे भरे वृक्षों की रक्षा करने से
सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना
यह सब आदर्श संस्कारों की ही देन हैं

जहां आदर्श संस्कार होते हैं
वही दया व परोपकार का भाव होता है
आदर्श संस्कार
आदर्श जीवन जीने की कला हैं
संस्कार हैं तो प्रेम व माधुर्य हैं

संस्कार हैं तो गरिमामय जीवन हैं
संस्कार हैं तो जीवन खुशहाल हैं
जहां आदर्श संस्कारों का अभाव है
वहीं हिंसा का ताण्डव हैं


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