देश की आन, बान और शान का प्रतीक : गणतंत्र दिवस | Devbhoomi Samachar

देश की आन, बान और शान का प्रतीक : गणतंत्र दिवस

विविध धर्म और संस्कृतियों वाले देश में एकता और समानता का अधिकार हमारे संविधान की ताकत हैं। देशवासियों में देशभक्ति जगेगी तभी लोगों में मानवता जगेगी। अतः राष्ट्र भक्ति का प्रचार-प्रसार भी जरुरी है। इसलिए हर कोई देशभक्ति के रंग में रंगा दिखाई देता है। देश के लिए कुर्बानी देने वाले शहीदों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

हम प्रति वर्ष छब्बीस जनवरी का दिन गणतंत्र दिवस के रुप में मनाते हैं और इस दिन हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाता है जो हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। इस तिरंगे में तीन रंग हैं। सबसे ऊपर केसरिया रंग हैं जो त्याग और बलिदान का प्रतीक है। इसके नीचे सफेद रंग हैं जो शांति का प्रतीक है और सबसे नीचे हरा रंग हैं जो देश की खुशहाली का प्रतीक है। इस तिरंगे के बीच में एक चक्र हैं जो निरन्तर प्रगति करते रहने का सूचक हैं। गणतंत्र दिवस की परेड में हमें हर वर्ष अद् भूत नजारे देखने को मिलते हैं। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के समारोह में हमारी संस्कृति के बेजोड नमूने, जीवन, कला, संस्कृति की झलक। वहीं हर राज्य का प्रतिनिधित्व देखने को मिलता हैं।

देश की समृध्द संस्कृति की झलक देखने को मिलती हैं। झांकियां दर्शाती हैं कि कर्म ही पूजा हैं। वहीं योगा, गरबा डांस, नृत्य, मोटरसाइकिल पर जवानों द्वारा शानदार प्रदर्शन, हेलिकॉप्टर व विमानों के करतब एवं प्रदर्शन, तिरंगे रंग के बेलुन उडाये जाते हैं। हमारे देश के शहीदों को नमन हैं जिन्होंने देश को आजादी दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया। हमारा संविधान हमारे लिए सबसे बडा और पवित्र ग्रंथ हैं। एक ऐसा ग्रंथ जिसमें हमारे जीवन का, हमारे समाज का, हमारी परम्पराओं और मान्यताओं का समावेश है और नयी चुनौतियों का समाधान।

आइये, अपने कर्तव्यों को निष्ठा के साथ निभाये तथा भ्रष्टाचार, गंदगी, गरीबी, आतंकवाद, जातिवाद व साम्प्रदायिकता से मुक्त नये भारत का नव निर्माण करें। गणतंत्र दिवस एक उत्सव हैं। स्वतंत्रता, समानता, सम्प्रभुता और भाईचारे के आदर्शों को दौहराने का। यह हमें भारतीय होने का गौरव का अहसास करने का अवसर हैं। हिनदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी देश की शिन हैं। छब्बीस जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। पूरा संविधान 22 भागों में बंटा हुआ है। संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह व 18 दिन का समय लगा। हमारा संविधान राष्ट्रीय एकता का संदेश देता हैं लिहाजा इसका आदर करना और इसकी अस्मिता को बचाये रखना हमारा दायित्व बनता है।

विविध धर्म और संस्कृतियों वाले देश में एकता और समानता का अधिकार हमारे संविधान की ताकत हैं। देशवासियों में देशभक्ति जगेगी तभी लोगों में मानवता जगेगी। अतः राष्ट्र भक्ति का प्रचार-प्रसार भी जरुरी है। इसलिए हर कोई देशभक्ति के रंग में रंगा दिखाई देता है। देश के लिए कुर्बानी देने वाले शहीदों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। इस राष्ट्रीय पावन पर्व पर भेदभाव की भावना से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, सौहार्द, संवेदनशीलता और भाईचारे की भावना को आत्मसात करें और देश की तरक्की में अपना हर संभव योगदान करने का संकल्प लें।

इस दिन सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा जैसी धुनें हमारे जवानों का हौसला बढाती हैं इस दिन दिन भर ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, मेरा रंग दे बसंती चोला जैसे देशभक्ति से ओत-प्रोत गाने गाये जाते हैं।‌ आइये, इस पावन अवसर पर हम शपथ लेते हैं कि हम अपने संविधान में विश्वास रखते हुए अपने मौलिक अधिकारों और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करुंगा और देश हित को सदैव निजी हित से ऊपर रखूंगा। मैं अपने देश की समृध्द विरासत और प्रकृति का सम्मान करुंगा एवं जाति और धर्म से ऊपर उठकर सभी के साथ समानता का व्यवहार रखूंगा। साथ ही साथ अपने गांव, गली, शहर, सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ और सुन्दर बनाने के लिए सदैव तत्पर रहूंगा। जय हिन्द। जय भारत।


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