मन मस्तिष्क की गंदगी और साबुन

सूर्य व चन्द्रमा हर रोज उदय व अस्त होते है व हर रोज वे नये उत्साह व उमंग के साथ उदय होते हैं तो फिर हमें भी हर रोज उत्साह व उमंग के साथ अपना कार्य आरंभ करना चाहिए। जब भी कार्य करे तब हंसते-हंसते व हंसते मुस्कुराते हुए करे चूंकि इससे जीवन में हताशा के बादल छंट जाते हैं व कार्य करने की क्षमता बढ जाती हैं। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

बर्तन व कपडे साबुन से ही चमकते हैं, ठीक उसी प्रकार व्यक्ति का मन और मस्तिष्क सकारात्मक सोच, उत्तम चिंतन, अच्छी संगत, आदर्श संस्कारों को ग्रहण करने से ही साफ होते हैं और मन व मस्तिष्क की गंदगी ( तमाम तरह की बुराइयां ) साफ होती हैं और व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है। ज्ञान केवल किताबों से ही नहीं मिलता है अपितु बडे बुजुर्गो व अनुभवी लोगों का संग करने से जीवन में व्यवहारिक ज्ञान मिलता हैं और वहीं ज्ञान हमें सफलता की राह पर लें जाता हैं। ज्ञान पाने की प्यास कभी भी नहीं बुझती है। यह हर रोज प्राप्त होता रहता हैं। बस यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसमें से कितना ग्रहण कर पाते हों।

ज्ञान केवल उन्हें ही प्राप्त होता है जिसमें ज्ञान हासिल करने की लालसा व जिज्ञासा हो। केवल हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। ज्ञान तो इसके आदान-प्रदान करने से ही बढता हैं, इसलिए पुस्तकों का साथ बनाएं रखें। महिला शिक्षा सशक्तिकरण की कुंजी हैं जब महिलाएं शिक्षित होगी तभी तो वह अपने अधिकारों के बारे में जानेगी। महिलाओं को शिक्षित करना लैंगिक भेदभाव के खिलाफ सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम हैं क्योंकि शिक्षित महिलाएं सामाजिक, आर्थिक या राजनैतिक प्रणाली में मौजूद अवसरों का उपयोग कर योग्यता साबित कर सकती हैं।

जिम्मेदारियों से मुंह न मोडे – ज्ञान केवल बांटने से ही बढता हैं। किसी की विकलांगता, अपंगता, गरीबी, लाचारी, मजबूरी का हमें कभी भी मजाक नहीं उडाना चाहिए, अपितु हो सके तो उनकी हर संभव सहायता करे। कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह न मोडे और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ निभाये।

ज्ञान का कहीं भी अंत नहीं – जब परमात्मा ने हमें इतना सुन्दर जीवन दिया हैं, प्राकृतिक सौन्दर्य, नदियां, पहाड, बहते झरने, बाग बगीचे, हरियाली, सुन्दर सुन्दर पशु पक्षी दिये हैं, खेत खलिहान दिये हैं तो क्या हम समाज में रहकर अपने साथियों व अपनों के बीच सुन्दर व आदर्श संस्कारों व विचारों का संदेश तो दे ही सकते हैं। कोई भी व्यक्ति अपनू आप में पूर्ण नहीं होता हैं। यही वजह है कि व्यक्ति को हर वक्त कुछ न कुछ सिखते ही रहना चाहिए, चूंकि ज्ञान का कहीं भी अंत नहीं है। इसलिए हमें हर रोज अपने आपको अपडेट करते रहना चाहिए।

हताशा के बादल – सूर्य व चन्द्रमा हर रोज उदय व अस्त होते है व हर रोज वे नये उत्साह व उमंग के साथ उदय होते हैं तो फिर हमें भी हर रोज उत्साह व उमंग के साथ अपना कार्य आरंभ करना चाहिए। जब भी कार्य करे तब हंसते-हंसते व हंसते मुस्कुराते हुए करे चूंकि इससे जीवन में हताशा के बादल छंट जाते हैं व कार्य करने की क्षमता बढ जाती हैं।

ना कहना भी सीखें – जीवन में क ई बार ऐसे भी अवसर आते हैं कि जब हम चाह करके भी किसी को ना नहीं कह पाते हैं। वहीं क ई अवसर ऐसे भी आते है कि जब हम किसी के गुणों का बखान करते हैं तो भी अनेक बातें ऐसी रह जाती है कि उस वक्त हम कहना ही भूल जाते हैं चूंकि वह पल ही ऐसा होता है कि जितना भी कहा जाये वह कम ही लगता है।

जीवन में कभी ना कहने का अवसर मिले तो तनिक भी नहीं घबराये, वरन् बिना हिचक के ना कह दीजिए ताकि कोई हमारे भरोसे न रहें। ना कहने में तनिक भी शर्मा शर्मी ना करे। चूंकि यह जरूरी नहीं है कि जब आप से किसी ने मदद मांगी हो तो उस समय आप फ्री हो। हो सकता है उसी वक्त आपको भी कोई जरुरी कार्य हो। आपके ना कहने से सामने वाला तनिक भी नाराज नहीं होगा, बस आप उसे ना कहने का स्पष्ट कारण बता दीजिए इसमें तनिक भी भूल ना करे अन्यथा सामने वाला बिना वजह आप से नाराज़ हो जायेगा।


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