बाल कहानी : फूड पोइजन

बाल कहानी : फूड पोइजन, बाद में स्कूल के स्टाफ व बच्चों के अभिभावकों द्वारा सूरज, चिकित्साकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जिनकी तत्परता से बच्चों का समय पर उपचार होने से एक बडा हादसा टल गया व बच्चों की जान बच गई। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

राहुल, राजेंद्र, चेतन चांद मोहम्मद, सूरज एक ही स्कूल में पढ़ते थे। उनकी कक्षाएं अलग-अलग थी, लेकिन वे स्कूल एक साथ ही जाते थे। उनकी मित्रता इतनी गहरी थी कि सभी विधार्थी व शिक्षक उन्हें मित्र कम भाई अधिक मानते थे। स्कूल आते-जाते वे रास्ते में बहुत हंसी-मजाक किया करते थे लेकिन कभी किसी का दिल नहीं दुखाया।

पढाई में भी सभी अव्वल थे। उनमें अधिक अंक लाने की सदैव हौड लगी रहती थी। लंच भी वे साथ ही करते थे। सूरज की शुरू से ही आदत थी कि वह बाजार का कोई खाना नहीं खाता था। सोमवार का दिन था। मित्रों ने स्कूल आते समय बाजार से लंच के लिए खाना पैक करा लिया।

लंच में सूरज को छोडकर सभी मित्रो ने बाजार से खरीदा हुआ भोजन किया और थोडी देर में उनकी तबीयत बिगडने लगी। स्कूल में हो-हल्ला मच गया सभी घबरा गये कि यह क्या हुआ। लेकिन सूरज ने तत्काल अपने पिताजी को फोन कर वस्तु स्थिति से अवगत कराया। सूरज के पिता डॉक्टर है।

वे तत्काल डाक्टरों, नर्सिग स्टाफ, आवश्यक दवाएं और एम्बुलेंस सेवा लेकर स्कूल पहुंचे और बीमार बच्चों का उपचार आरंभ कर दिया। उधर बच्चों के परिजन भी स्कूल पहुंच गए। समय पर उपचार मिलने से बच्चों की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। तब सभी ने राहत की सांस ली।

डाक्टरों ने कहा कि बच्चों को फूड पोइजन हो गया। अतः बच्चों को आराम की जरूरत है व उन्हें खान-पान में ध्यान रखना होगा। चंद दिनों में सभी बच्चे पूरी तरह से ठीक हो गये। सभी ने सूरज की सूझबूझ की सराहना की व बच्चों ने भविष्य में बाजार का चटपटा, तला भुना न खाने का संकल्प लिया।

बाद में स्कूल के स्टाफ व बच्चों के अभिभावकों द्वारा सूरज, चिकित्साकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जिनकी तत्परता से बच्चों का समय पर उपचार होने से एक बडा हादसा टल गया व बच्चों की जान बच गई।


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बाल कहानी : फूड पोइजन, बाद में स्कूल के स्टाफ व बच्चों के अभिभावकों द्वारा सूरज, चिकित्साकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जिनकी तत्परता से बच्चों का समय पर उपचार होने से एक बडा हादसा टल गया व बच्चों की जान बच गई। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

2 Comments

  1. शिक्षाप्रद कहानी । अति आवश्यक होने पर ही बाज़ार से खाना मँगवाए ।

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