मोटे अनाज की महत्ता | Devbhoomi Samachar

मोटे अनाज की महत्ता

मोटे अनाज की महत्ता, अब इसके गुणों को लोग पहचानने लगे हैं। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण व अन्य उपयोग जैसे पशु-चारा आदि के तौर पर इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। #ओम प्रकाश उनियाल

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार की जरूरत पड़ती है। पौष्टिक आहार से शरीर को ऊर्जा मिलती है। इसकी कमी से शरीर कुपोषण का शिकार हो जाता है। तरह-तरह की बीमारियां शरीर को घेरने लगती हैं। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण पड़ जाती है। पौष्टिक आहार क्या है? पौष्टिकता तो हर खाद्य-वस्तु में होती है। फल, सब्जियां, दालें, तिलहन, विभिन्न प्रकार का अन्न, मेवे, दूध, दही, घी आदि।

फर्क अनुपात का है। जहां तक अन्न की बात है तो गेहूं, चावल अधिकतर घरों में उपयोग में लाया ही जाता है। हालांकि, आजकल ‘जंक फूड’ का भी प्रचलन काफी बढ़ चुका है। जिसके कारण लोग अन्न से भी दूर होने का प्रयास कर रहे हैं। ‘जंक फूड’ को आलसियों का खाना माना जा सकता है। जिसे बनाने में न ज्यादा समय लगता है न ज्यादा मेहनत। कुछ तो इतना भी झंझट नहीं पालते बल्कि बाजार से बना-बनाया मंगा लेते हैं।

जंक फूड से क्षुधा नहीं मिटती ना ही पेट भरता है, अपितु शरीर में अनावश्यक बीमारियां जरूर पैदा हो जाती हैं। शरीर के लिए अन्न आवश्यक है। जहां गेहूं, चावल की खेती कम होती है या होती ही नहीं वहां मोटा अनाज उपयोग में लाया जाता है। मोटा अनाज के तहत रागी, ज्वार-बाजरा, रामदाना, कुटकी, सावा, झंगोरा, मंडुआ, चीना आदि आता है। जिस मोटे अनाज को कभी गरीबों का खाना कहा जाता था वही आज अमीरों की थाली की शान बन रहा है।

अब इसके गुणों को लोग पहचानने लगे हैं। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण व अन्य उपयोग जैसे पशु-चारा आदि के तौर पर इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। मोटे अनाज में औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। मोटे अनाज की खेती करने के लिए सिंचित भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ती। पहाड़ी इलाकों के ऊंचाई वाले इलाकों में सिंचाई के साधन न होने के कारण मंडुआ, झंगोरा आदि की खेती अधिक की जाती है।

मैदानी इलाके जहां केवल बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है वहां ज्वार-बाजरा, रागी जैसे मोटा अनाज की खेती की जाती है। मार्च 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा भारत की ओर से पेश वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ (इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर) घोषित करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। जिसे 70 देशों से अधिक का समर्थन मिला। भारत सरकार मोटे अनाज के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए बढ़-चढ़कर प्रचार-प्रसार कर रही है।

इसको बढ़ावा देने के लिए ‘श्री अन्न योजना’ शुरु की गयी है साथ ही देश के विभिन्न भागों में इससे संबंधित महोत्सवों का आयोजन किया जा रहा है। उत्तराखंड में भी 13 से 16 मई तक ‘श्री अन्न महोत्सव-2023’ का आयोजन किया गया।


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मोटे अनाज की महत्ता, अब इसके गुणों को लोग पहचानने लगे हैं। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण व अन्य उपयोग जैसे पशु-चारा आदि के तौर पर इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। #ओम प्रकाश उनियाल

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