‘स्वच्छता’ का संकल्प लें तीर्थयात्री

ओम प्रकाश उनियाल

उत्तराखंड में आजकल चारधाम, हेमकुंड साहिब व कांवड़ यात्रा चल रही है। हर यात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़-भाड़ का उमड़ना स्वभाविक बात है। श्रद्धा और आस्था के भाव के साथ देवभूमि में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। अन्य प्रख्यात धार्मिक स्थलों पर भी भक्तगण काफी संख्या में आते ही रहते हैं।

मध्य हिमालय ऋषि-मुनियों की तपस्थली होने के साथ-साथ देवस्थली भी है। अनेकों देवालय यहां स्थित हैं। इसीलिए उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। पवित्र गंगा-यमुना का उद्गम-स्थल, बद्री-केदार, हरिद्वार आदि देवस्थलों वाली भूमि के दर्शन से भला कौन वंचित रहना चाहेगा? लेकिन चिंता इस बात की है कि इन पवित्र स्थलों की पवित्रता बनाए रखने में कोई सहयोग नहीं करता।

नदियों व धार्मिक स्थलों के आसपास का वातावरण तो दूषित किया ही जाता है यात्रा-मार्गों पर भी जगह-जगह प्लास्टिक व अन्य प्रकार का कचरा नजर आता है। जबकि, ‘स्वच्छता बनाए रखें’ के बोर्ड भी यात्रियों को जागरूक करने के लिए गड़े रहते हैं। जिनकी तरफ कोई ध्यान ही नहीं देता। हिमालय देश का रक्षक होने के साथ-साथ तमाम प्राणियों व जीव-जंतुओं को जीवन भी दे रहा है।

हिमालय से शुद्ध वायु का संचरण होता है, स्वच्छ जल-धाराएं निकलती हैं। जिन्हें बेहिचक और बेधड़क प्रदूषित किया जा रहा है। जिसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकीय-तंत्र पर पड़ रहा है। केवल धार्मिक-यात्रा करने वाले ही नहीं बल्कि घूमने के उद्देश्य से आने वाले भी स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लेकर चलें तो निश्चित है कि हिमालय प्रदूषण-मुक्त हो जाएगा। आखिर कब तक हिमालय प्रदूषण का बोझ ढोता रहेगा?


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड) | Mob : +91-9760204664

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देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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