अभ्यर्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ | Devbhoomi Samachar

अभ्यर्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़

सुनील कुमार माथुर

आज हम 21 वीं शताब्दी में जीने की बातें करते हैं और अपने आपकों आत्मनिर्भर व प्रतिस्पर्धी कहते हैं वही दूसरी ओर इस प्रतिस्पर्धा के युग में विधार्थियों के जीवन के साथ किस तरह से खिलवाड हो रहा हैं । यह भुगतभोगी विधार्थी और उसका परिवार ही जानता हैं । चूंकि सरकार ने तो प्रतियोगी परीक्षा कराने के नाम पर धन कमाना आरम्भ कर दिया हैं । परीक्षा शुल्क के नाम पर विधार्थियों से मोटी रकम वसूली जाती हैं ।

परीक्षा के नाम पर नाना प्रकार के मनमाने नियम बनायें जाते हैं । परीक्षा के नाम पर जूते – चप्पल खुलवाएं जाते हैं । शर्ट व कुर्ते की बांह काट दी जाती हैं और भी न जाने क्या – क्या नियम अपनाये जाते हैं जिससे परीक्षा का दूर तक कोई लेना – देना नहीं है लेकिन सरकार नकल रोकने के नाम पर ऐसे बेहूदा नियम बनाकर सस्ती लोकप्रियता हासिल कर रही हैं लेकिन परीक्षा में नकल रोकने व पेपर लीक के मामले में सरकारी मशीनरी पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है चूंकि भ्रष्टाचार की गंगा में डूबकी ऊपर से नीचे तक का हर अधिकारी व कर्मचारी लगा रहा हैं ।

वे यह नहीं सोचते हैं कि विधार्थियों की आज कितनी दयनीय स्थिति हैं । खाने को घर में भले ही अनाज न हो लेकिन अभिभावक अपना घर – खेत – खलिहान गिरवी रखकर या उन्हें बेचकर या परिवार के गहने बेचकर बच्चों को पढाते हैं कि यह पढ – लिख गये तो हमारी दयनीय स्थिति में कुछ सुधार आयेगा और इन बुरे दिनों से मुक्ति मिलेगी ।

विधार्थी भी पूरे साल कडी मेहनत करते हैं और परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के लिए जी तोड मेहनत करते हैं मगर सरकारी कर्मचारी मनमानी करके विधार्थियों को दूर – दूर के इलाकों में परीक्षा केन्द्र देकर परीक्षा से पहले ही हताश व निराश कर देते हैं और ऊपर से इतने कडे नियम की दो मिनट की देरी हो गयी तो परीक्षा भवन में प्रवेश नहीं । यह कैसी बेतुकी बात।

परीक्षा आज कोई नई बात नहीं है । पहले भी होती थी और अब भी हो रही है । पहले विधार्थी अगर आधे घंटे लेट आता था तब भी परीक्षा में बैठाया जाता था । हां उसे अतिरिक्त समय नहीं दिया जाता था । आज पेपर कडी सुरक्षा के बीच बनते हैं । छपते हैं और वितरित होते हैं । इसके बावजूद भी उसके लीक हो जाने का अर्थ हैं ऊपरी स्तर से निचले स्तर तक मिली भगत हैं और सुरक्षा के सारे दावे खोखले हैं ।

बार – बार पेपर लीक होना सरकार की परीक्षा के प्रति घोर उदासीनता को दरसाता हैं । परीक्षा का होना । पेपर लीक होना व लाखों रूपये में बिकना फिर परीक्षा का निरस्त होना एक सोची समझी चाल के सिवाय कुछ भी नहीं है । परीक्षा का निरस्त होने का अर्थ लाखों प्रतिभागियों के जीवन से खिलवाड करना । सरकार बार – बार यही कहती हैं कि पेपर लीक करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा । भले ही वह कितने भी उच्च पदों पर आसीन क्यों न हो । लेकिन बाद में सब रफा-दफा हो जाता हैं और विधार्थियों का भविष्य बर्बाद हो जाता हैं ।

सरकार नाटकबाजी बंद करें और जब – जब पेपर लीक हो या परीक्षा में बडे पैमाने पर नकल पकडी जायें तब – तब सरकार इस धांधली की नैतिक जिम्मेदारी अपने पर लेते हुए उस साल उस परीक्षा में बैठने वाले तमाम विधार्थियों को उतीर्ण समझ कर सरकारी सेवा में नियुक्ति दे । आखिर विधार्थियों के जीवन से कब तक खिलवाड़ होता रहेगा ।

सरकार दोषियों को कठोर से कठोर दंड दे व भविष्य में सामूहिक नकल व पेपर लीक की घटनाएं न हो इसके लिए पुख्ता प्रबंध करे । सरकार परीक्षाओं को हल्के में न ले । केवल विधार्थियों के लिए निशुल्क बसे चलाकर सरकार अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती । समस्या तो समाधान चाहती है न कि दलगत राजनीति ।

राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर ध्दारा वर्ष 1986 में आयोजित कनिष्ठ लिपिक संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के बाद जब सरकारी सेवा में नियुक्ति के दौरान जमकर भारी धांधली मची तब सफल अभ्यार्थियों ने पहले राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली और फिर सुप्रीम कोर्ट कि शरण ली । विधार्थियों के हक में देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितम्बर 1993 में फैसला दे दिया था लेकिन राजस्थान सरकार की हठधर्मिता के चलते इन विधार्थियों को राजस्थान सरकार ने अप्रैल – मई 2000 में नियुक्ति दी लेकिन जो करीबन सात साल प्रतिभावान विधार्थियों व उनके अभिभावकों ने आर्थिक व मानसिक वेदना झेली उसका लाभ आज तक सरकार ने नहीं दिया । इतना ही नहीं हमारे जनप्रतिनिधि व मुख्यमंत्री शिकायती पत्रों का जवाब तक नहीं देते है ।

केवल कह देने से कोई सरकार लोक कल्याणकारी सरकार नहीं हो जाती हैं आपितु इसके लिए धरातल पर खरा उतरना पडता हैं । मात्र सता की कुर्सी हथिया लेना ही जन कल्याणकारी सरकार नहीं हो जाती हैं । अब भी वक्त हैं कि सता में भले ही कोई सी पार्टी क्यों न हो उसे जनता के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए । सरकार अपने वायदे पर खरी उतरे और सभी के साथ समान व्यवहार करे।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार माथुर

लेखक एवं कवि

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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