साइबर ठगों को देते थे बैंक खाता, बीटेक इंजीनियर और बीकॉम कर रहा युवक गिरफ्तार | Devbhoomi Samachar

साइबर ठगों को देते थे बैंक खाता, बीटेक इंजीनियर और बीकॉम कर रहा युवक गिरफ्तार

पूछताछ के दौरान मुकुल ने बताया कि वह नौकरी की तलाश कर रहा था। इस बीच उसकी मुलाकात ललित से हुई। ललित के कहने पर उसने अपने नाम से खाता खुलवाकर उसे दिया। इसके बदले मुकुल को पांच फीसदी कमीशन मिलने लगा। बाकी का पांच फीसदी खुद ललित रख लेता था। पुलिस ने ललित को भी गिरफ्तार कर लिया।

नई दिल्ली। मध्य जिला के साइबर थाना पुलिस ने कमीशन पर साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध करवाने वाले दो युवकों को यूपी के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गांव बामनपुर, बुलंदशहर निवासी मुकुल शर्मा और गांव इलना, बुलंदशहर निवासी ललित कुमार के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपियों के पास चार मोबाइल फोन के अलावा कई बैंक खातों की जानकारी जुटाई है। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि मुकुल के एक ही खाते में चंद दिनों के भीतर 50 लाख रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ है। आरोपी फिलहाल 500 लोगों से ज्यादा लोगों से ठगी की बात स्वीकार कर रहे हैं।

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त संजय कुमार सेन ने बताया कि न्यू राजेंद्र नगर निवासी दिव्या खुराना नामक महिला साइबर ठगी की शिकार हो गई थी। किसी ने उनके दो बैंकों से 42 हजार रुपये गायब कर दिए थे। पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।

जांच के लिए साइबर थाना प्रभारी खेमेंद्रपाल सिंह व अन्यों की टीम को लगाया गया। छानबीन में पता चला कि दिव्या के खाते से निकाली गई रकम को खाता बुक एप में डाला गया। इसके बाद रकम बुलंदशहर में खोले गए पंजाब नेशनल बैंक के खाते में ट्रांसफर हुई। खाते के आधार पर पुलिस उसके मालिक मुकुल शर्मा के पास पहुंची।

पूछताछ के दौरान मुकुल ने बताया कि वह नौकरी की तलाश कर रहा था। इस बीच उसकी मुलाकात ललित से हुई। ललित के कहने पर उसने अपने नाम से खाता खुलवाकर उसे दिया। इसके बदले मुकुल को पांच फीसदी कमीशन मिलने लगा। बाकी का पांच फीसदी खुद ललित रख लेता था। पुलिस ने ललित को भी गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। आरोपी ललित बीटेक पास है, जबकि मुकुल बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। ललित के बिहार, झारखंड और मेवात के साइबर ठगों से संपर्क हैं। वह 10 फीसदी कमीशन के आधार पर इनको बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। जितनी भी ठगी की रकम खाते में आती थी उसमें यह लोग 10 फीसदी के हिस्सेदार थे।


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