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अच्छे लोगों की तलाश

 इस नश्वर संसार में कभी भी किसी के भरोसे न रहें क्योंकि हमें अपनी लडाई खुद लडनी होगी। जब आप सुख चैन की जिंदगी जी रहें हैं तो आपके हजार मित्र, रिश्तेदार होगे। लेकिन जैसे ही आप पर संकट के बादल मंडराने लगे और आप किसी संकट में पड गये तो आपके ही लोग पराये हो जायेगे… #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर (राजस्थान)

इस नश्वर संसार में स्वार्थी लोगों की भरमार पडी हैं। एक ढूंढों तो हजार मिल जायेगे, लेकिन अच्छे लोगों का मिलना कठिन है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अच्छे लोगों की तलाश करना ही छोड दें। जिन्हें अच्छे लोग, मित्र, सहपाठी व पडौसी मिल जाये तो समझिए कि वे भाग्यशाली हैं वरना इस स्वार्थ की दुनियां में हर कोई अपना फायदा ही ढूंढता हैं। इसलिए अच्छे लोगों की तलाश करने के बजाय आप खुद एक नेक इंसान बन जायें।

घमंड न करें – जीवन में कभी भी अंहकार व घमंड न करें। अंहकार जीवन का नाश ही करता हैं। इसलिए जीवन में जहां तक हो सके प्रेम पूर्वक व्यवहार करे। हर व्यक्ति में कोई न कोई कमी होती हैं। कोई भी सर्वगुण संपन्न नहीं होता है। इसलिए कभी भी यह न सोचे कि अमुक व्यक्ति को मैं मदद न करता तो उसका क्या होता। अरें मूर्ख ! जीवन की यह नैया और संसार के नियम कायदों को तू नहीं अपितु यह दुनियां वह परमपिता परमात्मा चला रहा हैं फिर तुझे काहे का घमंड हैं। घमंड तो रावण का भी नहीं चला तो फिर तू किस खेत की मूली हैं।

अच्छाई बुराई – अच्छाई और बुराई एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों के बिना हम एक दूसरे का अर्थ नही समझ सकते। ये तो हमारे कर्मों का फल हैं। अच्छे कर्म करोगें तो आपको समाज में सर्वत्र मान सम्मान व इज्जत मिलेगी और बुरे कर्म करोगे तो सर्वत्र आपकी निंदा होगी। लोग आपकों बुरा कहेगे व आप से हर वक्त सजग व सतर्क रहेंगे। इसलिए जीवन में कभी भी किसी का अहित व बुरा न करे। आप जैसा कर्म करेगे वैसा ही आपको फल मिलेगा। इसमें कोई दो राय नहीं है।

अपनी लडाई आप लडे – इस नश्वर संसार में कभी भी किसी के भरोसे न रहें क्योंकि हमें अपनी लडाई खुद लडनी होगी। जब आप सुख चैन की जिंदगी जी रहें हैं तो आपके हजार मित्र, रिश्तेदार होगे। लेकिन जैसे ही आप पर संकट के बादल मंडराने लगे और आप किसी संकट में पड गये तो आपके ही लोग पराये हो जायेगे और कोई भी आपकी मदद के लिए आगे नहीं आयेगा। इसलिए हमेंशा सोच समझ कर कार्य करे और अपनी सोच को सकारात्मक रखिए।

ज्ञानी और अनुभवी – आज का युग विज्ञान का युग है और हर कोई अपने आप को ज्ञानी व अनुभवी होना का दंभ भरता हैं। हकीकत में देखा जाये तो इनसे मूर्ख दूसरा कोई नहीं है। जो अपने आप को ज्ञानी व अनुभवी समझते हैं वे मूर्खो की दुनियां में जीते हैं। वे अल्पज्ञानी होते हैं और थोथे चने की तरह वे हर जगह अपना अर्ध कचरा ज्ञान बांटते रहते हैं।



वे यह भूल जाते हैं कि जब हम ज्ञानी होते हैं तब हम मात्र शब्दों को ही समझ पाते है लेकिन जब हमें उन शब्दों का अर्थ समझ में आने लगता हैं तब हम अनुभवी कहलाते। ज्ञानी और अनुभवी ये दोनों शब्द अलग अलग हैं व इनका अर्थ भी अलग-अलग है। अतः जीवन में ज्ञानी होने के साथ-साथ अनुभवी भी होना चाहिए। केवल ज्ञान पर घमंड नही करना चाहिए। हमारा अनुभव ही हमारी सफलता की पहली सीढ़ी है।


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