[box type=”success” align=”alignleft” class=”” width=”100%”] कविता : तेरा-मेरा ज़ब भाग अलग, दीपक में तेल असीमित है तेरे...
सिद्धार्थ गोरखपुरी
कविता : दुआ बख्शे या बद-दुआ बख्शे, उसकी फ़ितरत बदली है अभी, उसकी आदतें कहाँ सम्भली है...
गीत : गरीबी… भविष्य के भरोसे रात गुजर जाती है, जिंदगी एक बार फिर से मुकर जाती...
कविता : इक मर्द दिखाई देता है, करुणा कलित हृदय में पीड़ा डेरा डाले सोती है, अनेक...
कविता : समझ, समझदारी से अगर कुछ समझ आया भी, तो इसे समझ का नाम-ओ-निशां न समझ, तेरी...
गीत : जर्रा-जर्रा, त्याग दिया मन की हर भाषा, आशा से तौबा कर डाला, मन से मन...
सिद्धार्थ गोरखपुरी जेहन का हर बोझ त्यागकर मन का हर इक संकोच त्यागकर भेद मैं मन के...
सिद्धार्थ गोरखपुरी कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे! प्रेम की प्रमाणिकता का प्रमाण हो राधे! https://devbhoomisamachaar.com/wp-content/uploads/2026/04/SM-Add-Apr-2026.mp4...
सिद्धार्थ गोरखपुरी https://devbhoomisamachaar.com/wp-content/uploads/2026/04/SM-Add-Apr-2026.mp4 तेरे ही दिल में अबतक है मेरा बोरिया -बिस्तर ठहराव प्रिये तब भी क्यों...
सिद्धार्थ गोरखपुरी कमरे के अगले दरवाज़े से वो क्लास में पैठा करती थी लड़कियों वाली पहली पंक्ति...













