October 17, 2026

सिद्धार्थ गोरखपुरी

[box type=”success” align=”alignleft” class=”” width=”100%”] कविता : तेरा-मेरा ज़ब भाग अलग, दीपक में तेल असीमित है तेरे...
सिद्धार्थ गोरखपुरी जेहन का हर बोझ त्यागकर मन का हर इक संकोच त्यागकर भेद मैं मन के...
सिद्धार्थ गोरखपुरी कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे! प्रेम की प्रमाणिकता का प्रमाण हो राधे! तुम्हारे...
सिद्धार्थ गोरखपुरी तेरे ही दिल में अबतक है मेरा बोरिया -बिस्तर ठहराव प्रिये तब भी क्यों होता...
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