गीत : कौन कहता है कठिन?

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सिद्धार्थ गोरखपुरी

कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे!
प्रेम की प्रमाणिकता का प्रमाण हो राधे!

तुम्हारे अपरिमित प्रेम ने ही
कृष्ण को कान्हा बनाया
प्रेम की अविरल धार ने ही
तुमको था राधा बनाया
हर इक जटिल प्रश्नों का तुम समाधान हो राधे
कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे!

बांसुरी से भी मीठी धुन
थी कंठ में बसती तुम्हारे
बांसुरी लयबद्ध होती
सुनके गीत तुम्हारे सारे
संगीत के हर राग का नव तान हो राधे
कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे!

प्रेम से सिंचित जमीं पर
पुष्प आशा का लगाकर
तुम गईं संसार से
प्रेम की भाषा बताकर
प्रेम के असंख्य ग्रंथो का व्याख्यान हो राधे
कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे!

मन में मूरत श्याम की
और उर में प्रेम प्रवाह लेकर
कृष्ण की मन से हुईं तुम
अनन्त सागर चाह लेकर
कृष्ण के मन और हृदय का सम्मान हो राधे
कौन कहता है कठिन? आसान हो राधे!

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