
प्रख्यात कवयित्री एवं लेखिका सुखमिला अग्रवाल से साहित्यकार राजीव कुमार झा की इस बातचीत में कविता, समाज, कबीर, भक्ति साहित्य, संगीत, नारी सशक्तिकरण और समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई है। उनका मानना है कि साहित्य का उद्देश्य समाज को दिशा देना और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करना है। कवयित्री एवं लेखिका सुखमिला अग्रवाल से राजीव कुमार झा की बातचीत…
- कबीर का साहित्य और दर्शन कालातीत है
- समाजोपयोगी साहित्य की आज सबसे अधिक आवश्यकता
- संगीत और कविता एक-दूसरे के पूरक हैं
- आत्मविश्लेषण से ही समाज का वास्तविक सुधार संभव
प्रश्न 1: काव्य-सृजन में आपकी विशेष अभिरुचि रही है और साहित्य में आपकी विशिष्ट पहचान एक कवयित्री के रूप में स्थापित हुई है। आपने किन-किन काव्य रूपों में लेखन किया है? अपनी भावाभिव्यक्ति के बारे में कुछ बताइए।
उत्तर: जी हाँ, काव्य के प्रति मेरा रुझान बचपन से ही रहा है। रेडियो पर भी मैं बाल कविताएँ पढ़ा करती थी। मुझे सामान्यतः नारी और सामाजिक विषयों पर लिखना पसंद है। मैं दोहे, कुंडलिया, माहिया तथा छंदमुक्त कविताएँ भी लिखती हूँ।
प्रश्न 2: आपने हिंदी और समाजशास्त्र दोनों विषयों में एम.ए. किया है। वर्तमान समय में साहित्य में समाजोन्मुखता की प्रवृत्ति को लेकर काफी लिखा जा रहा है। साहित्य और समाज के संबंधों पर आपके क्या विचार हैं?
उत्तर: साहित्य समाज का अभिन्न अंग है। जितना अच्छा और उपयोगी साहित्य लिखा जाता है, समाज उतना ही उन्नत होता जाता है। आज की सामाजिक विसंगतियों को देखते हुए एक साहित्यकार होने के नाते समाजोपयोगी और प्रेरणास्पद लेखन पर ध्यान केंद्रित रखना आवश्यक है।
प्रश्न 3: आपने कबीर पर पुस्तक लिखी है। निर्गुण भक्ति के महान कवि कबीर के जीवन-दर्शन को किस प्रकार देखती हैं?
उत्तर: कबीर साहिब के दर्शन को शब्दों में व्यक्त करना वैसा ही है, जैसे बाल्टी में समंदर भर देना। जाति, धर्म, क्षेत्र और समुदायों से ऊपर उठकर सामान्य जीवन की गहन अनुभूतियों से अध्यात्म तक का जो गूढ़ साहित्य उन्होंने रचा, वही उनकी विलक्षणता का प्रमाण है। कबीर का साहित्य और दर्शन कालातीत है। जब तक पृथ्वी पर जीवन रहेगा, उसकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
प्रश्न 4: कबीर के अतिरिक्त भक्ति काल के किन कवियों ने आपके मानस को सबसे अधिक प्रभावित किया?
उत्तर: कबीर के अलावा भक्ति काल के महान कवि एवं युगद्रष्टा संत तुलसीदास जी का संपूर्ण साहित्य मेरे लिए अलौकिक प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने मानव जीवन की सूक्ष्म से सूक्ष्म जटिलताओं को जिस प्रकार अभिव्यक्त किया है, वह अद्भुत है। ऐसा साहित्य, जो जनमानस की रग-रग में समाया हो, विरल ही देखने को मिलता है।
प्रश्न 5: आपकी रुचि संगीत में भी है। संगीत को काव्य का प्रमुख तत्व माना जाता है। वर्तमान दौर में कविता संगीत के सहज संस्पर्श से दूर क्यों होती जा रही है?
उत्तर: संगीत एक रूहानी अहसास है और उसकी अभिव्यक्ति के लिए साहित्य तथा संगीत दोनों अभिन्न हैं। आज जीवन में भौतिकता बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप छंदबद्ध रचनाओं की अपेक्षा मुक्त लेखन अधिक होने लगा है।
प्रश्न 6: क्या ग़ज़ल अपनी सांगीतिक योजना और आरोह-अवरोह के कारण अधिक लोकप्रिय हो रही है?
उत्तर: जी, बिल्कुल। लेखन में मधुरता संगीत से आती है। आरोह-अवरोह, ताल-लय, सुर और गति के कारण ग़ज़लों का सूफ़ियाना स्वरूप पाठकों और श्रोताओं को सहज ही आकर्षित करता है।
प्रश्न 7: वर्तमान समय में महिलाओं और विशेषकर बालिकाओं के यौन उत्पीड़न की घटनाएँ पूरे देश को विचलित कर रही हैं। क्या इसके पीछे सामाजिक और वैधानिक व्यवस्था की कमियों को भी जिम्मेदार मानती हैं?
उत्तर: यह सत्य है कि मनुष्यता के पतन के कारण ऐसी हृदयविदारक घटनाएँ सामने आ रही हैं। जिस दिन हमारी सामाजिक और वैधानिक व्यवस्था आरोपियों के विरुद्ध त्वरित और कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगी, उसी दिन समाज में व्यापक परिवर्तन दिखाई देगा।
प्रश्न 8: आपने अपने जीवन के शुरुआती दौर में नारी स्वावलंबन से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। आज भी ऐसे कार्यों की आवश्यकता को किस रूप में देखती हैं?
उत्तर: जी हाँ, मैं कई वर्षों तक महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के अभियान से जुड़ी रही। इस दौरान निःशुल्क रोजगारोन्मुखी कक्षाएँ भी संचालित कीं। मैंने अनुभव किया कि समाज के निचले तबके की अनेक महिलाएँ पीड़ित, दबी-कुचली और सहमी हुई जिंदगी जीने को विवश हैं। उन्हें शिक्षित कर मुख्यधारा से जोड़ना आज भी अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 9: आप किस शहर की निवासी हैं? अपने मायके और ससुराल के बारे में कुछ बताइए।
उत्तर: जयपुर मेरा जन्मस्थान है। मेरे पिताजी लगभग 90 वर्ष पहले सामोद गाँव से छठी कक्षा तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए जयपुर आए। यहीं उन्होंने स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की और भारत सरकार की सेवा में कार्य किया।
हम सभी भाई-बहनों का जन्म, शिक्षा और विवाह जयपुर में ही हुआ। मेरा ससुराल भी जयपुर में है। मेरे पति चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। हमारी दो बेटियाँ हैं।
प्रश्न 10: अंत में, एक लेखिका के रूप में समाज को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर: कहना तो बहुत कुछ चाहती हूँ, लेकिन फिलहाल इतना अवश्य कहूँगी कि हम सभी को आत्मविश्लेषण की अत्यंत आवश्यकता है। समाज हम सब मिलकर बनाते हैं। यदि समाज पतन की ओर जा रहा है, तो केवल दूसरों पर उँगली उठाने के बजाय हमें यह देखना चाहिए कि उस पतन के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कितने जिम्मेदार हैं। यदि हम स्वयं को सुधारेंगे, तो समाज भी अपने-आप सुधरने लगेगा।
राजीव कुमार झा
इंदुपुर, पोस्ट–बड़हिया जिला–लखीसराय, बिहार – 811302
मोबाइल: 6206756085









