
यह बाल-कविता बच्चों को शिक्षा, मेहनत, अच्छे संस्कार और नेक इंसान बनने की प्रेरणा देती है। कविता में बच्चों के नन्हे सपनों को किताब, मुस्कान और अच्छे कर्मों से जोड़ते हुए जीवन में आगे बढ़ने और परिवार व समाज का नाम रोशन करने का संदेश दिया गया है।
- नन्हे हाथों में किताब, आंखों में मुस्कान
- पढ़-लिखकर रोशन करना नाम
- अच्छे संस्कारों का नन्हा सपना
- बच्चों को नेक इंसान बनने की सीख
डॉ. प्रियंका सौरभ
नन्हे हाथों में किताब,
आँखों में मुस्कान।
पढ़-लिखकर तू एक दिन,
बढ़ाना अपना मान।।
खेलो-कूदो, पढ़ो खूब,
करना अच्छे काम।
मेहनत करके एक दिन,
रोशन करना नाम।।
मीठे बोलो, सच बोलो,
सबका रखना ध्यान।
मिल-जुलकर तुम रहना,
बनना नेक इंसान।।
(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)
डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान)
कवयित्री | सामाजिक चिंतक | स्तंभकार, उब्बा भवन, आर्यनगर
हिसार (हरियाणा) – 125005








