
पिथौरागढ़ के राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में चार शिक्षकों के तबादले के बाद विषयवार शिक्षकों की कमी को देखते हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर तैनात किया गया है। इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन समिति में नाराजगी है और जल्द शिक्षक नियुक्त न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। वहीं, एक अन्य मामले में परिवीक्षाकाल पूरा नहीं होने के बावजूद अनुरोध पर किए गए शिक्षिका के तबादले को अपर निदेशक ने रद्द कर दिया है, जिससे तबादला प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
- चार शिक्षकों के तबादले के बाद जीआईसी बांसबगड़ में शिक्षक संकट
- विषयवार शिक्षकों की कमी के बीच प्राथमिक शिक्षक को इंटर कॉलेज भेजा
- उत्तराखंड में शिक्षक तबादलों की प्रक्रिया फिर सवालों के घेरे में
- 20-25 साल से दुर्गम में तैनात शिक्षक, दो साल भी पूरे नहीं और तबादला
पिथौरागढ़। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में हालिया शिक्षक तबादलों के बाद पिथौरागढ़ जिले के राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में शिक्षक व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। विद्यालय से एक साथ चार शिक्षकों के तबादले के बाद विषयवार शिक्षकों की कमी पैदा हो गई। स्थिति यह बनी कि गणित विषय में एलटी स्तर का शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक को इंटर कॉलेज में शिक्षण कार्य के लिए तैनात करना पड़ा। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की इंटर कॉलेज में तैनाती को लेकर अब विभागीय तबादला प्रक्रिया और शिक्षकों की उपलब्धता की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षा विभाग में पिछले दिनों बड़ी संख्या में तबादले किए गए हैं। बताया गया है कि प्रदेश में 1500 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले हुए हैं। इन तबादलों के बाद कई विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता और विषयवार व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पिथौरागढ़ के जीआईसी बांसबगड़ का मामला भी इसी कड़ी में सामने आया है, जहां एक साथ चार शिक्षकों के स्थानांतरण से विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
चार शिक्षकों के तबादले से बनी स्थिति
खंड शिक्षा अधिकारी मुनस्यारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार जीआईसी बांसबगड़ से विभिन्न विषयों के शिक्षकों के तबादले किए गए। एक ही विद्यालय से चार शिक्षकों के स्थानांतरण के बाद स्थानीय स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने शिक्षकों के तबादले को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि विद्यालय से शिक्षकों को हटाया गया है तो उसके समानांतर वैकल्पिक व्यवस्था भी तत्काल की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। विद्यालय में शिक्षकों की कमी के बीच गणित विषय के एलटी स्तर पर शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आई।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने छात्रहित में वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय रुमीडोला, मुनस्यारी के सहायक अध्यापक कमलेश जोशी की जीआईसी बांसबगड़ में शिक्षण कार्य के लिए तैनाती की। मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत के मुताबिक विद्यालय से चार शिक्षकों के तबादले हुए हैं। गणित एलटी स्तर पर कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की तैनाती की गई है। विभाग का तर्क है कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों की पढ़ाई को जारी रखने और विषय शिक्षक की कमी को तत्काल पूरा करने के उद्देश्य से की गई है।
प्रबंधन समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी
प्राथमिक शिक्षक को इंटर कॉलेज में तैनात किए जाने के बाद विद्यालय की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष भी सामने आया है। विद्यालय प्रबंधन समिति का कहना है कि शिक्षकों की कमी का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। समिति के अनुसार यदि विद्यालय में जल्द पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो इसके विरोध में जन आंदोलन शुरू किया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि किसी विद्यालय से एक साथ कई शिक्षकों का तबादला किया जाता है तो उसके बाद खाली होने वाले पदों पर जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
तबादला प्रक्रिया का एक और मामला
इसी बीच शिक्षा विभाग में तबादलों से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया है, जिसमें पद पर दो साल पूरे नहीं होने और परिवीक्षाकाल पूरा नहीं होने के बावजूद एक शिक्षिका का अनुरोध के आधार पर तबादला कर दिया गया था। बाद में इस तबादले को रद्द कर दिया गया। जीआईसी चहज, पिथौरागढ़ में सहायक अध्यापिका हेमलता खाती का तबादला राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंगोलीहाट किया गया था। अपर निदेशक कुमाऊं मंडल गजेंद्र सिंह सौन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि शिक्षिका को सहायक अध्यापक एलटी के पद पर अभी दो वर्ष पूरे नहीं हुए हैं।
इसके अलावा उनका परिवीक्षाकाल भी पूरा नहीं हुआ था। इन परिस्थितियों को देखते हुए उनके तबादले को रद्द कर दिया गया। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षकों के तबादलों में नियमों के अनुपालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर ऐसे शिक्षक हैं जो लंबे समय से दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात हैं, वहीं दूसरी ओर कम अवधि में तबादले से जुड़े मामलों के सामने आने से विभागीय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा तेज हो गई है।
20 से 25 साल से दुर्गम में तैनात शिक्षक
शिक्षा विभाग की तबादला प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा सवाल उन शिक्षकों को लेकर है जो लंबे समय से दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। विभागीय स्तर पर यह बात सामने आती रही है कि कई शिक्षक 20 से 25 वर्ष तक दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने के बाद भी सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा करने के बावजूद उन्हें मनचाही या सुगम तैनाती नहीं मिल पा रही है। इसके विपरीत जब ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें किसी शिक्षक की एक पद पर अपेक्षाकृत कम अवधि हुई हो और तबादला अनुरोध के आधार पर किया गया हो, तो इससे पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
शिक्षकों की कमी और तबादलों के बीच संतुलन की चुनौती
पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिले में विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता पहले से ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में तबादलों के दौरान केवल शिक्षक को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना आवश्यक हो जाता है कि संबंधित विद्यालय में उसके स्थान पर शिक्षक उपलब्ध है या नहीं। जीआईसी बांसबगड़ में चार शिक्षकों के एक साथ तबादले के बाद प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को इंटर कॉलेज में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में भेजा जाना इसी चुनौती को सामने लाता है। शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों की पढ़ाई निरंतर चलती रहे, इसके लिए विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी है।
खासकर गणित जैसे विषय में एलटी स्तर का शिक्षक नहीं होने पर विद्यालय के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में विभाग ने तत्काल व्यवस्था तो की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रही मांग यह है कि विद्यालय में नियमित और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। ताजा घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तबादलों के बाद विद्यालयों में उत्पन्न होने वाली शिक्षक कमी का समाधान करना भी जरूरी है। ऐसे में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया में नियमों के पालन के साथ-साथ विद्यालयवार और विषयवार आवश्यकता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





