
मध्य प्रदेश के मंडला जिले की वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षिका डॉ. नवनीता दुबे ‘नूपुर’ से साहित्यकार राजीव कुमार झा की इस बातचीत में कविता, नारी-साहित्य, लोकसंस्कृति, लघुकथा, ग़ज़ल और साहित्यिक यात्रा के विविध आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई है। उन्होंने कविता को जीवन की सहज अनुभूति और समाज कल्याण का सशक्त माध्यम बताया। मध्य प्रदेश के मंडला जिले की चर्चित कवयित्री डॉ. नवनीता दुबे ‘नूपुर’ से राजीव कुमार झा की बातचीत…
- समाज कल्याण ही साहित्य का उद्देश्य होना चाहिए
- मंडला की संस्कृति ने मेरे लेखन को समृद्ध किया
- नारी का हृदय शाश्वत सत्य का सृजन करता है
- लघुकथा और ग़ज़ल कम शब्दों में गहरी बात कहती हैं
प्रश्न: ‘नूपुर की सरगम’ आपका कविता-संग्रह है। इसमें संग्रहित कविताओं के बारे में बताइए। जीवन की किस प्रकार की अनुभूतियों को आपने अपनी कविताओं में प्रकट किया है?
उत्तर: नूपुर की सरगम मेरा प्रथम स्वरचित काव्य-गीत संग्रह है, जो सन् 2013 में जेएमडी पब्लिकेशन, दिल्ली से प्रकाशित हुआ। यह संग्रह मेरी प्रेरणास्रोत स्वर्गीय माताजी, लेखिका श्रीमती कमला देवी जी को सादर समर्पित है। मेरे इस स्वरचित काव्य-गीत संग्रह को जबलपुर की प्रसिद्ध साहित्य संस्था ‘कादम्बरी’ द्वारा चयनित कर पुरस्कृत किया गया है।
“जीवन संगीत है, नूपुर की सरगम।”
इस संग्रह में मैंने अपनी सहज अनुभूतियों और भावनाओं को मार्मिक अभिव्यंजना के साथ प्रस्तुत किया है। देश की असंगतियों और विसंगतियों को भी भावभूमि पर रखा है। प्रेम, दोस्ती, मेरा गाँव, गुहार, आईना आदि भावों से पगी रचनाएँ हैं, जिन्हें पाठकों ने अत्यंत पसंद किया है। नारी के उत्कर्ष और सशक्तिकरण का भी कृतियों में उल्लेख है। जीवन के हर पहलू का भावपूर्ण चित्रण किया है।
प्रश्न: आप मंडला जिले की निवासी हैं। इस अंचल के जनजीवन और कला-संस्कृति के बारे में बताइए।
उत्तर: मैं मध्य प्रदेश के मंडला जिले की निवासी हूँ। यहाँ की संस्कृति, लोककलाएँ और भाषा अद्भुत हैं। नर्मदा जी से तीन ओर से घिरे मंडला जिले में प्राचीन किले हैं, जो रानी अवंति बाई और राजा हृदयशाह के इतिहास के साक्षी हैं। यहाँ उदयचंद जैसे अमर शहीदों ने जन्म लिया। मण्डन मिश्र जैसे आध्यात्मिक महापुरुष हुए, जिन्होंने शंकराचार्य जी के साथ शास्त्रार्थ किया। रानी दुर्गावती भी अत्यंत विदुषी और वीर रानी थीं। यहाँ प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान कान्हा किसली स्थित है, जो अपनी सुरम्य वादियों और वन्य जीवों के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। अनेक प्राचीन एवं गौरवशाली मंदिर और ऐतिहासिक स्थल भी यहाँ हैं। कर्मा, शैला आदि लोकनृत्य यहाँ की सांस्कृतिक पहचान हैं। गौड़ राजाओं का शासन रहा है तथा गौड़ी, बुंदेली और बघेली बोलियों का मिश्रित स्वरूप यहाँ प्रचलित है।
प्रश्न: अपने घर-परिवार, माता-पिता, शिक्षा-दीक्षा तथा वर्तमान जीवन से जुड़े कार्यों के बारे में बताइए।
उत्तर: मेरा जन्म मंडला में हुआ। पिताजी का तबादला नरसिंहपुर जिले में होने के बाद मैं वहीं पली-बढ़ी और शिक्षित हुई। मैंने हिंदी साहित्य में एम.ए. तथा बी.एड. किया। साहित्य के प्रति बचपन से ही लगाव रहा, इसलिए समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन करती रही। मेरी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं और साहित्यिक यात्रा आज भी अनवरत जारी है। मुझे अनेक मंचों पर काव्य-पाठ और सम्मान प्राप्त हुए हैं। विद्या वाचस्पति एवं हिंदी रत्न सम्मान की मानद उपाधियाँ भी प्राप्त हुई हैं। मेरा एक अन्य छंद काव्य-संग्रह भी प्रकाशनाधीन है। मेरे माता-पिता और भाई-बहनों ने लेखन के लिए सदैव प्रोत्साहित किया। मैं घर में सबसे छोटी हूँ। वर्तमान में शासकीय शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूँ। मेरा सुखद वैवाहिक जीवन है। मेरे पति स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। मेरा एक पुत्र कॉलेज में अध्ययनरत है तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। परिवार में माता-पिता की स्मृतियाँ हैं तथा मेरी सासू माँ हमारे साथ हैं।
प्रश्न: आज के दौर में नारीवादी साहित्य लेखन के बैनर तले कुछ लेखिकाएँ साहित्य सृजन कर रही हैं। इसके बारे में आपका क्या कहना है?
उत्तर: जी हाँ, अनेक लेखिकाएँ नारी सशक्तिकरण पर लेखन कर रही हैं। मैं भी नारी शक्ति और उसके गौरव पर आधारित रचनाएँ लिखती रहती हूँ। लेकिन केवल नारीवादी साहित्य ही संपूर्ण साहित्य नहीं है। प्रत्येक लेखिका के लेखन का उद्देश्य संपूर्ण समाज का कल्याण होना चाहिए। समाज के प्रत्येक पक्ष पर विचार करना आवश्यक है। मैं हर समसामयिक विषय पर सृजनरत रहती हूँ।
प्रश्न: नारी हृदय के शाश्वत भावों और विचारों से अनुप्राणित काव्य-लेखन के बारे में अपने विचार बताइए।
उत्तर: यह बहुत सुंदर प्रश्न है।
मेरे विचार से नारी का कोमल हृदय अपने भीतर के शाश्वत सत्य को ही अपनी रचनाओं में उकेरता है। नारी जितनी कोमल और सुकुमारी है, आवश्यकता पड़ने पर उतनी ही रणचंडी का रूप भी धारण कर सकती है। आज की नारी प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी है और अपने हृदय के उद्गारों को अपनी कला के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही है।
प्रश्न: आपके मन-प्राण पर किन कवियों और लेखकों के साहित्य का अमिट प्रभाव है?
उत्तर: बचपन से ही मैं मुंशी प्रेमचंद और महादेवी वर्मा की रचनाएँ पढ़ती आई हूँ और उनके भावपूर्ण लेखन से अनुप्रेरित रही हूँ। प्रेमचंद के उपन्यास गोदान, रंगभूमि, कर्मभूमि तथा कफन और बूढ़ी काकी जैसी कहानियों ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। महादेवी वर्मा की रचनाएँ “कौन तुम मेरे हृदय में” तथा “यह मंदिर का दीप” सहित नीरजा, दीपशिखा और नीहार ने मुझे अत्यंत भाव-विभोर किया है। हिंदी साहित्य के लगभग सभी रचनाकारों से मुझे प्रेरणा मिलती है।
प्रश्न: आप लघुकथा और ग़ज़ल लेखन भी करती हैं। साहित्य की इन दोनों विधाओं की लोकप्रियता के क्या कारण हैं?
उत्तर: जी, मैं लघुकथाएँ और ग़ज़लें भी लिखती हूँ। मेरी ग़ज़लें रिश्तों के सत्य और मन की अनुभूतियों को अभिव्यक्त करती हैं। लघुकथा संक्षिप्त होते हुए भी प्रभावी संदेश देने वाली विधा है, जिसमें मैं समाज की विद्रूपताओं और यथार्थ को उकेरने का प्रयास करती हूँ। इन दोनों विधाओं की लोकप्रियता का मुख्य कारण यही है कि कम शब्दों में गहरी बात कही जा सकती है। लघुकथा कम समय में प्रभाव छोड़ती है, जबकि ग़ज़ल सीमित पंक्तियों में हृदय की गहन अनुभूतियों को अत्यंत सुंदर और सुघड़ शैली में अभिव्यक्त कर देती है। यही विशेषता इन्हें लोकप्रिय बनाती है।
परिचय
डॉ. नवनीता दुबे ‘नूपुर’
वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षिका
मंडला, मध्य प्रदेश
राजीव कुमार झा
इंदुपुर, पोस्ट–बड़हिया
जिला–लखीसराय, बिहार – 811302
मोबाइल: 6206756085









