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खोयी साख उबारने की कोशिश में कांग्रेस

ओम प्रकाश उनियाल

कांग्रेस अपनी डूबती नैया को पार लगाने के लिए कई तिकड़म लगाती आ रही है। फिर भी कहीं से किसी प्रकार की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। खासतौर पर जब तक देश की सत्ता मोदी के हाथ रहेगी तब तक कांग्रेस को भटकना ही पड़ेगा। 2014 के बाद जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।

पंजाब में तो आप जैसी पार्टी ने ही कांग्रेस को इतनी बुरी तरह धो डाला जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। 2024 की चिंता कांग्रेस को शायद अभी से सताने लगी है। इस बीच अभी अन्य राज्यों के भी विधानसभा चुनाव होने हैं। जिस प्रकार के हालात से इन आठ सालों में कांग्रेस को गुजरना पड़ा यदि आगे भी यही स्थिति बनी रही तो एक दिन वह आएगा जब कांग्रेस को लोग भूल ही जाएंगे।

अपनी नैया पार लगाने के लिए हाथ-पैर मार रही कांग्रेस ने राजस्थान के उदयपुर में तीन दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। जिसमें नयी रणनीति के तहत उबरने पर जोर दिया गया।

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जन आकांक्षाओं के अनुरूप कांग्रेस को मजबूत बनाने, चुनावों के लिए तैयार करने के लिए व्यापक संगठनात्मक सुधारों की घोषणा, सलाहकार समूह के गठन पर विशेष बल देकर अन्य कई प्रस्ताव पारित किए गए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि देश के सामने जो असाधारण परिस्थितियां हैं उनका असाधारण तरीके से मुकाबला करना है।

इस अवसर पर दल द्वारा जनता से जुड़कर कांग्रेस को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया। सवाल यह है कि कांग्रेस के पास वक्त कम है उबरने के लिए, क्या वहअपनी जिस साख को खो चुकी है उसको पुनर्जीवित कर पाएगी?


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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