ऐसे कैसे होगा पर्यावरण संरक्षण…?

ओम प्रकाश उनियाल
मनुष्य को जिंदा व स्वस्थ रहने के लिए जिस प्रकार से पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है उसी प्रकार स्वच्छ जल व शुद्ध वायु की भी। इन सबके प्रदूषित होने से तरह-तरह की बीमारियां शरीर को घेर लेती है। आज के समय में वातावरण इतना प्रदूषित हो चुका है कि मनुष्य ही नहीं बल्कि हर प्राणी प्रभावित हो रहा है।
शुद्ध वायु, साफ पानी मात्र कल्पना बनता जा रहा है। मनुष्य ही इसके लिए दोषी है। जानते-समझते हुए भी अनभिज्ञ बना रहता है। एक तरफ पर्यावरण संरक्षण की बात करता है तो दूसरी तरफ उसी की ही आड़ में पर्यावरण को प्रदूषित करने पर तुला रहता है। विश्व के कुछेक देशों को छोड़कर अधिकतर देश पर्यावरण संरक्षण को लेकर नागरिक सजग तो हैं ही अपना कर्तव्य भी समझते हैं।
जिम्मेदारी से सरकार के साथ सहभागिता करते हैं। हमारे देश में स्थिति इसके ठीक उल्ट है। यहां पहले पर्यावरण संगठन व समितियां बनती है फिर उन पर राजनीति की जाती है, तत्पश्चात गोष्ठियां, चर्चाएं होती हैं और फिर वही ‘ढाक के तीन पात’। पिछले कई सालों से 5 जून को प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। इसके बाबजूद भी जलवायु-परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
कारण कहीं न कहीं चूक हो रही है। विश्व की बढ़ती आबादी का दबाव पृथ्वी पर पड़ रहा है। मनुष्य प्रकृति पर अपना एकछत्र अधिकार चाह रहा है। विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य पारिस्थितकीय-तंत्र को नष्ट कर रहा है।
वाहनों का अनावश्यक उपयोग, औद्योगिक इकाइयों से निकलता जहरीला रसायन व धुंआ, ई-कचरा, प्लास्टिक व अन्य प्रकार का कचरा, सीवरेज का गंदा पानी जैसे कारण भी पर्यावरण को खराब कर रहे हैं। और तो और हम अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने तक की जुर्रत नहीं करते।
हवा और पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए खाली जगहों पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए, केवल वृक्षारोपण ही नहीं उनकी देखभाल भी की जाए, नदियों में किसी प्रकार की गंदगी न बहायी जाए, वाहनों का अनावश्यक उपयोग रोका जाए तो काफी हद तक पर्यावरण शुद्ध रह सकता है। जागरूकता भी जरूरी है लेकिन एक दिन का अभियान चलाकर नहीं बल्कि निरंतरता बनाकर।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »ओम प्रकाश उनियाललेखक एवं स्वतंत्र पत्रकारAddress »कारगी ग्रांट, देहरादून (उत्तराखण्ड) | Mob : +91-9760204664Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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