दहशत की जिंदगी जीते कश्मीरी पंडित

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ओम प्रकाश उनियाल

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों द्वारा एक महिला शिक्षिका को मौत के घाट उतारे जाने से कश्मीरी पंडितों में फिर से दहशत का माहौल बना हुआ है। पिछले माह ही एक कर्मचारी राहुल भट की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। आतंकियों द्वारा इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने से गैर-हिन्दुओं में असुरक्षा की भावना और ज्यादा बढ़ रही है। केन्द्र सरकार से कश्मीरी पंडित बार-बार सुरक्षा की मांग उठाते आ रहे हैं।

सुरक्षाबलों की पैनी नजर व चाक-चौबंद सुरक्षा-व्यवस्था को धत्ता बताकर आतंकी घटनाओं का घटना वास्तव में चिंता की बात है। शिक्षिका की हत्या के विरोध में कश्मीरी पंडितों में रोष व्याप्त है। कश्मीरी पंडितों की हत्या किए जाने व जुल्म ढाहे जाने का सिलसिला नब्बे के दशक में शुरु हुआ था। तब भारी संख्या में उनका पलायन हुआ था। पलायन किए हुए ऐसी स्थिति में अपने घर वापस लौटने में डर रहे हैं। वे आज भी तंगहाली में जीवन जी रहे हैं।

पिछली सरकारें आतंकी घटनाएं रोकने में पूरी तरह विफल रहीं। जिसके कारण सीमापार से आतंकियों की संख्या में बढ़ोतरी होती रही। आतंकवादियों एवं अलगाववादियों को शरण मिलती रही।

परिणामस्वरूप जन्नत कही जाने वाली जम्मू-कश्मीर की धरती लाल होती रही। वर्तमान सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत धारा 370 हटायी गयी और 31 अक्टूबर 2019 को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर व लद्दाख बना दिए गए।

मोदी सरकार सन् 2014 में बनी थी। उनके कार्यकाल में पुलवामा, उरी जैसी बड़ी आतंकी हमले हुए जिनका जवाब भारत सरकार ने समय-समय पर देकर सीमापार से होने वाली घुसपैठ पर काफी हद तक रोक लगायी। तमाम सख्ती, सुरक्षा व सतर्कता के बाद भी आतंकवादी वहां रह रहे कश्मीरी पंडितों पर हावी हो रहे हैं। ऐसे में उनके पास पलायन करने के सिवाय अन्य कोई विकल्प नहीं है। आखिर कब सुकून मिलेगा इन्हें?


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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