
यह बाल कविता एक जिज्ञासु बालक और प्रकृति के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाती है। पेड़-पौधों, पत्तों और फलों के माध्यम से बालक प्रकृति से सीखता है और प्रेम, संरक्षण तथा पर्यावरण संवर्धन का संदेश देता है। कविता बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और वृक्षारोपण के महत्व को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।
- प्रकृति की गोद में नन्हा बालक
- पेड़ों से सीखता बचपन
- बाल मन और हरियाली का संसार
- वृक्षों का प्रेम, बच्चों का संदेश
डॉ. सत्यवान सौरभ
नन्हा मुन्ना बाल है,
आँखों में अरमान।
पेड़ों की हर डाल से,
करता है पहचान।।
डाली थामे देखता,
पत्तों का संसार।
प्रकृति माँ की गोद में,
पाता है वह प्यार।।
फल को छूकर पूछता,
कैसे हुए जवान।
चुपके-चुपके पेड़ भी,
देते उसको ज्ञान।।
छोटे-छोटे हाथ हैं,
सपने हैं भरपूर।
सीख रहा है खेल में,
जीवन के दस्तूर।।
पौधे, पत्ती, फूल सब,
इसके सच्चे मित्र।
इनसे ही खिलता रहे,
बचपन का यह चित्र।।
पेड़ लगाओ प्रेम से,
यह प्रकृति का मान।
नन्हा बालक दे रहा,
यही संदेश महान।।
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक हैं।)
डॉ. सत्यवान सौरभ
कवि, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पैनलिस्ट
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी), भिवानी हरियाणा








