सुख-शांति और समृद्धि | Devbhoomi Samachar

सुख-शांति और समृद्धि

सुनील कुमार माथुर

एक दिन चेतन को रात्रि में लक्ष्मी जी ने सपने में दर्शन दिये कि मैं सात दिन बाद यह घर छोडकर यहां से चली जाऊंगी अतः तुम्हें जो कुछ भी मांगना हैं वह मांग लीजिए । चेतन ने लक्ष्मी जी से कहा कि मुझे एक दिन का समय दीजिए ताकि मैं अपने परिवार वालों से पूछ लू कि क्या चाहिए । लक्ष्मी जी ने कहा कि ठीक हैं । मैं रात में फिर तुम्हारे सपने में आऊंगी ।

सवेरे चेतन ने अपने परिवारजनों को सपने वाली बात बताई बच्चों ने कहा कि लक्ष्मी जी से कहिये कि अच्छा से बंगला , गाडी , नौकर – चाकर दे दीजिए । हमें इसके अलावा कुछ भी नहीं चाहिए । माता – पिता ने कहा कि बेटा हमारी जिन्दगी तो जैसे तैसे गुजर गयी । हम तो अब कुछ दिनों के मेहमान है इसलिए हमारी तो कोई इच्छा नहीं है ।

पत्नी ने कहा कि आप लक्ष्मी जी से कहिये कि घर में सदैव सुख – शांति व समृध्दि बनी रहे । बच्चे आपस में मिलजुल कर रहें व सभी का मान सम्मान करें । कहने का तात्पर्य यह है कि घर – परिवार में हर हाल में परिवारवालों में आपसी प्रेम व स्नेह बना रहे । घर में हर समय सुख – शांति व समृध्दि बनी रहे ।

रात्रि में लक्ष्मी जी फिर से चेतन के सपने में आयी और पूछा कि बोलों क्या चाहिए । तब चेतन ने सारी बात लक्ष्मी जी को बता दी । लक्ष्मी जी ने कहा कि जहां प्रेम, सुख , शांति व समृध्दि हो लक्ष्मी का वास वही होता हैं । इसलिए मैने इस घर से जाने का अपना फैसला स्थगित कर दिया और आज तक लक्ष्मी जी वही विराजमान है ।

कहने का तात्पर्य यह है कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम बना रहना चाहिए । सुख – दुःख में वे एक – दूसरे की मदद करें और आपसी सामंजस्य बनायें रखें । जहां ऐसा माहौल हैं वही आज के समय में स्वर्ग है । जहां नियमित रूप से भजन कीर्तन व सत्संग होता हैं वहीं ईश्वर का वास होता हैं.


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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सुनील कुमार माथुर

लेखक एवं कवि

Address »
33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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