कविता में भोजपुरी तड़का : आलू की असलियत कि इंसानी फितरत, बाकी ललका त ललके ह, चोखा...
साहित्य लहर
कविता : जगत जननी भू-माता, ग्वाल बालों के साथ रास रचाते हैं। कभी गैया चराते है। कभी...
कविता : चिड़िया रानी, क्यों हमसे तुम डरती हो डाली ऊपर रहती हो हम चाहें तुमको छू लेना...
कविता : गाजीपुर, पूर्वाचल एक्सप्रेस-वे का नजारा है दरिया से तुम्हें दिखाएंगे, चांदपुर गांव के टुल प्लाजा...
बूढ़ा दिसम्बर, सदी को 20 तैईसवां बरस लग रहा है। दि–दिलों का सं– संबन्ध ब– बरकरार र–...
कविता : सबकी प्यारी गुडिया, नाना-नानी कहने लगे देखों घर में दो दो गुडियां, एक गुडिया छुटकी है...
कविता : समझ, समझदारी से अगर कुछ समझ आया भी, तो इसे समझ का नाम-ओ-निशां न समझ, तेरी...
कविता : मेरी नजर में, सुनहरी किरणों का कोमल जाल अरी सुंदरी अब बीत जाएगा यह साल जो...
कविता : इस नए साल में क्या लिखूं, कंबल विहीन का शीत लिखूं, या गर्म रक्त की...
कविता : जाता हुआ दिसंबर, आओ समेट लो खुशियां तुम, मना लो त्यौहार मैं जा रहा हूं!, आने...














