कविता : रात की बात…! रौशनी रहते न देख पाएगा, कदम डगमगाएगा और तू, लड़खड़ा कर गिर जाएगा, जबकि...
साहित्य लहर
कविता : पूस की रात, कोहरे की चादर से, देखो ढकी तराई है, सूरज की किरणें भी...
कविता : याद आता है, हमारे पास अब न वक्त है मां-बाप की खातिर लिया जो वक्त...
कविता : नया साल, इस दिन घर के पास जिसे भी देखना उसके पास जाना शायद वह...
लघुकथा : पढ़ाई, कुमुद ने शादी की तो किताबें छूट गईं। बच्चों की मार्कशीट देख कर खुश...
लघुकथा : अकेला, पहली बार किसी युवती से उसके दैहिक संबंध कायम हुए थे और रागिनी उससे...
खेतों में फैली हरियाली, खेतों में फैली हरियाली, मधुवन में खिले सुमन, तितली के पंखों पर हंसती,...
कविता : बहाना, बिल्कुल भरोसा नहीं रहा अब जमाने का, अब जमाना नहीं रहा हमें सताने का,...
उसके गालों में लट, हां चांदनी मे लिख सकती हूं! पर वो बाहर आती नहीं, सुना है उसे...
एक सच्चाई, कितना भी बलशाली क्यों न हो वह? या पुत्र किसी बाप का! आगे अपनी सोचो करने का...














