कविता : इक मर्द दिखाई देता है, करुणा कलित हृदय में पीड़ा डेरा डाले सोती है, अनेक...
साहित्य लहर
कविता : अंतरात्म में विवेकानंद, ज्ञान ज्योति प्रज्वलित करो और क्रोधाग्नि को शांत करो अस्तित्व स्वयं का...
कविता : बचपन के दिन, साथ में मेरा पूरा परिवार और उनके प्यार, उस समय बिताये गलियो मे...
कविता : भेद सभी मिटाते हैं, तोड़ ऊंच-नीच के सारे बंधन भेद सभी मिटाते हैं स्वामी जी के...
कविता में भोजपुरी तड़का : आलू की असलियत कि इंसानी फितरत, बाकी ललका त ललके ह, चोखा...
कविता : जगत जननी भू-माता, ग्वाल बालों के साथ रास रचाते हैं। कभी गैया चराते है। कभी...
कविता : चिड़िया रानी, क्यों हमसे तुम डरती हो डाली ऊपर रहती हो हम चाहें तुमको छू लेना...
कविता : गाजीपुर, पूर्वाचल एक्सप्रेस-वे का नजारा है दरिया से तुम्हें दिखाएंगे, चांदपुर गांव के टुल प्लाजा...
बूढ़ा दिसम्बर, सदी को 20 तैईसवां बरस लग रहा है। दि–दिलों का सं– संबन्ध ब– बरकरार र–...
कविता : सबकी प्यारी गुडिया, नाना-नानी कहने लगे देखों घर में दो दो गुडियां, एक गुडिया छुटकी है...














