कविता : समझ, समझदारी से अगर कुछ समझ आया भी, तो इसे समझ का नाम-ओ-निशां न समझ, तेरी...
साहित्य लहर
कविता : मेरी नजर में, सुनहरी किरणों का कोमल जाल अरी सुंदरी अब बीत जाएगा यह साल जो...
कविता : इस नए साल में क्या लिखूं, कंबल विहीन का शीत लिखूं, या गर्म रक्त की...
कविता : जाता हुआ दिसंबर, आओ समेट लो खुशियां तुम, मना लो त्यौहार मैं जा रहा हूं!, आने...
कविता : सच सच कह दिया, जाग कर चांदनी रातों में खत जो लिखे। ख्याल मन में जो...
कविता : उजियारा, हम उसी वक्त से अब तक रहे समाये यारों की यह बस्ती आज खौफ...
कविता : फर्क, भर आते हैं नैन! लुट जो गये हैं चैन दुश्मन देश की दुल्हा वाली.....
होठों से वो गीत छूट ही गया, मैं भी चल पड़ा मिलने! होंठों को सुना न आंखें...
कविता : आया क्रिसमस, लाया खुशियां अपार, चर्च पर रंग बिरंगी रोशनी के बीच, जगमगा रहे हैं...
कविता : उनकी यादों में, अपनी आकृति में जंजीरों में जकड़े समय की गाथा सुनाते हमें तोड़ना...














