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एक नजर कोटद्वार की तरफ

ओम प्रकाश उनियाल

कोटद्वार गढ़वाल का प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ प्रसिद्ध मंडी भी है। खोह नदी के किनारे बसा होने के कारण खोहद्वार नाम से जाना जाता था जो कि बाद में कोटद्वार नाम से जाना जाने लगा। पौड़ी जिले के इस नगर की सीमा नजीबाबाद जिला बिजनौर से लगती है। मंडी होने के कारण यहां हर समय चहल-पहल भी खूब नजर आती है।

अंग्रेजी शासनकाल में जब इस इलाके में रेल लाइन बिछी तब से यह नगर निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर होता रहा। लोगों की बसावट भी यहां लगातार बढ़ने लगी। नगर पालिका, तहसील समेत अन्य सरकारी कार्यालय यहां हैं। निजी विद्यालयों की भी संख्या बढ़ रही है।

उच्च-शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की काफी आवश्यकता है। राज्य बनने के बाद आबादी बढ़ने से सीमेंट-कंक्रीट के जंगलों का जाल बिछता रहा है जिसके कारण हरियाली गायब होती जा रही है। पहाड़ के गांवों से लोग यहां पलायन करते जा रहे हैं।

कोटद्वार में सिद्धबली बाबा मंदिर, कण्वाश्रम, देवी मंदिर, चर्च आदि प्रसिद्ध स्थल हैं। यहां पर आने-जाने के लिए हर प्रकार की परिवहन सुविधा उपलब्ध है। ठहरने के लिए होटल्स, गेस्ट हाउसिस, होम-स्टे काफी संख्या में हैं।

सुरक्षा की दृष्टि से फिलहाल शांत क्षेत्र है। रेलवे स्टेशन, बस-अड्डा, अन्य प्रकार की परिवहन सेवा आसपास ही हैं। लेकिन अतिक्रमण व जाम की स्थिति मार्गों पर देखी जा सकती है।

कोटद्वार को जिला बनाने की मांग काफी समय से चली आ रही है जो कि सरकारों की हीलाहवाली के चलते अधर में लटकी हुई है। जिला बनने से यहां विकास की और राह खुलेगी।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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ओम प्रकाश उनियाल

लेखक एवं कवि

Address »
बंजारावाला, देहरादून (उत्तराखण्ड)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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