सशक्तिकरण और स्वावलंबन

सुनील कुमार माथुर
नारी की महिमा अपरम्पार है । नारी पर जितना लिखा जायें उतना ही कम हैं । अगर हम नारी पर लिखना आरम्भ करें तो न जानें कितने पन्ने रंग जायेगे लेकिन उसकी महिमा फिर भी पूरी नहीं होगी । नारी इतनी महान होने के बावजूद भी आज वह सुरक्षित नहीं है । उस पर आयें दिन जुल्म हो रहें है । मारपीट , बलात्कार , अश्लीलता के व्यंग्यबान उस पर कसे जा रहें है । कहने का तात्पर्य यह है कि आज देश भर में नारी सुरक्षित नहीं है ।
हमारे देश में हर दिन कोई न कोई अनहोनी कहीं न कहीं महिलाओं के साथ हो रही हैं इसके बावजूद कठोर कानून सरकार नहीं बना रहीं है । वर्तमान कानून कायदों में लचीलेपन के चलते अपराधी तत्व कानून में कोई न कोई गली ढूंढ ही लेता हैं और अपना बचाव कर लेता हैं जिसके कारण आपराधिक कृत्यों को बढावा मिल रहा हैं ।
हम सदियों से सुनते आ रहे हैं कि जुल्म करना अपराध हैं और जुल्म को सहना उससे भी बडा अपराध हैं । यह बातें सुनने व पढनें में ही अच्छी लगती हैं चूंकि अगर ऐसा सही मायने में होता तो आज जन जागरूकता के लिए आवाज नहीं उठानी पडती और देश का हर नागरिक जागरूक होता लेकिन बेरोजगारी के कारण देश भर में अपराध बढते ही जा रहें है ।
नारी के साथ आयें दिन घटित होने वाली अशोभनीय घटनाएं न केवल चिंता की बात हैं अपितु शिक्षित कहे जाने वालें इस भारत वर्ष के गाल पर करारा तमाचा है । मीडिया जब ऐसे समाचारों को सनसनीखेज समाचार बनाकर देता हैं तो सिर शर्म से झुक जाता हैं और नारी की अस्मिता तार – तार हो जाती हैं ।
नारी कोई पैर की जूती नहीं है वह एक कुशल गृहिणी है । गृह लक्ष्मी हैं । मां दुर्गा व सरस्वती हैं । वह वंदनीय और पूज्यनीय है । वह एक कुशल प्रशासक के रूप में येन- केन – प्रकारेण घर के सभी सदस्यों को एकता के साथ बांधे रखती हैं । घर के कार्य करतें हुए वह कई बार बुरी तरह से थक जाती हैं लेकिन उफ तक नहीं करती हैं ।
वह घर – परिवार के सभी सदस्यों से पहलें उठती हैं और सभी सदस्यों के सोने के बाद सोती हैं और दिन भर घर के कार्यों को निपटाने में लगी रहती हैं लेकिन कभी अपनी थकान का रोना किसी के भी सामने नहीं रोती हैं आखिर वह भी तो इंसान हैं कोई मशीन नहीं । दिन भर वह परिवार के हर सदस्य की फरमाइशें ही पूरी करने में लगी रहती हैं लेकिन कभी अपनी भी कोई इच्छा होगी इसका जिक्र किसी के पास नहीं करती हैं ।
वह परिवार के हर सदस्य को तरह – तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर खिलाती हैं तभी तो उसे अन्नपूर्णा कहा जाता हैं । इतना कुछ करने के बावजूद जब उसके साथ अन्याय व अत्याचार होता है तो ऐसी शिक्षा को लानत है । क्या हमारी शिक्षा पद्धति हमें यहीं सिखाती हैं ? नहीं तो फिर नारी के साथ जुल्म क्यों ? अन्याय व अत्याचार क्यों ? वह घर गृहस्थी की आदर्श प्रशासक है । वह जिस तरीके से गृहस्थी की गाडी चला रही हैं वह अपने-आप में एक एक कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है ।
वह एक आदर्श शिक्षिका की भी महत्वपूर्ण भूमिका को निभा रहीं है और बच्चों को आदर्श व संस्कारवान और चरित्रवान बनाइये रख रही हैं । वह बच्चों को आदर्श जीवन जीने की कला सिखाती है । उन्हें होनहार व ज्ञानवान बनाती हैं । कहने का तात्पर्य यह है कि आज कि नारी विविध विधाओं में निपूर्ण हैं । फिर भी उसके साथ कदम – कदम पर अन्याय व अत्याचार हो रहें है आखिर क्यों —–क्यों—–?
सही मायने में तो नारी गुणों की खान हैं । वह सद् गुणों की खान हैं । उसके बारें में जितना भी लिखा जायें वह कम हैं । उस पर लिखने का अर्थ हैं सूर्य को दीपक दिखाना । वह तो ममता की मूर्त हैं । हमारी प्रेरणा पूंज हैं । दया , ममता व करूणा की सागर हैं । नाना प्रकार के दुःख , पीडा , चिन्ताएं मन के भीतर ही भीतर वह सहन करती रहती हैं लेकिन फिर भी कभी वह उफ भी नहीं करती हैं । चूंकि वह तो करूणा , दया , ममता, वात्सल्य की प्रतिमूर्ति हैं ।
इंसान में आज जो अहम् आ गया हैं । वह शराब से भी खराब है और जब उसके अहम् को चोट लगती हैं तो वह उसका गुस्सा नारी पर अत्याचार करके निकालता हैं जो एक घटिया सोच व घटिया मानसिकता का परिचायक है । इंसान नकारात्मक सोच का त्याग कर सकारात्मक सोच रखें तो उसका घर किसी स्वर्ग से कम नहीं है । कहा भी जाता हैं कि भगवान हर एक व्यक्ति के घर में रोज – रोज नहीं रह सकते इसीलिए उन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में नारी को हमारे घर में ईश्वर स्वरुप में भेजा हैं जो हर पल घर – परिवार, सगे-संबंधियों के बारें में ही सोचती रहती है कभी भी अपनें बारें में नहीं सोचती हैं ।
तभी तो हमारे शास्त्रो में नारी को वंदनीय और पूज्यनीय बताया गया हैं । नवरात्रा में कन्या पूजन किया जाता हैं और उनके पांव धोकर गृह – स्वामी उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराता हैं व दक्षिणा दी जाती हैं । इससे स्पष्ट होता है कि नारी वंदनीय व पूज्यनीय है । उस पर अन्याय व अत्याचार करने का तात्पर्य हैं अपने देवताओं का अपमान करना और जिसने देवताओं का अपमान किया उसको परमात्मा ने सदैव येन केन प्रकारेण दंडित ही किया हैं ।
हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति मे अब तक चार प्रतिभागियों ने ही एक करोड़ तक की रकम जीती हैं और ताज्जुब की बात यह हैं कि वे चारों एक करोड़ रूपये जितने वाली महिलाएं ही हैं जिन्होंने अभिनेता अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर जिस ज्ञान , बुध्दि व कोशल के साथ जवाब दिया वह अपने-आप में काबिले तारीफ हैं । इसने यह साबित कर दिया कि नारी किसी से कम नहीं है ।
हमारे महापुरुषों का कहना हैं कि परिस्थिति की पाठशाला इंसान को वास्तविक शिक्षा देती हैं । सुखी मन और अच्छी भावना यहीं जीवन की सच्ची सम्पत्ति है । देश में राजा , समाज में गुरू , परिवार में पिता , घर में स्त्री ये कभी साधारण नहीं होते हैं क्योंकि निर्माण और प्रलय इन्हीं के हाथों में होता हैं ।
नारी का सम्मान करने के लिए एवं महिलाओं और बेटियों के प्रति होने वालें अपराधों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किये जायें । महिलाओं के विरूद्ध अपराध रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जायें वही आपराधिक प्रवृत्ति के लोगो को हतोत्साहित किया जायें इतना ही नहीं महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जायें ।
शिक्षा, सुरक्षा, सशक्तिकरण और स्वावलम्बन की प्राथमिकताओं में हर राज्य को सबसे इन प्राथमिकताओं को रखना चाहिए । महिलाओं को आगें बढने के लिए समान अवसर देकर उन्हें हर क्षेत्र में प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि महिलाओं और बेटियों के जीवन में बदलाव आ सकें । बालिकाओं में आत्मविश्वास बढाने की दृष्टि से विभिन्न जिलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण का आयोजन किया जायें तथा बालिकाओं व महिलाओं के लिए पुलिस विभाग में भर्ती हेतु सशक्त वाहिनी अभियान का संचालन किया जायें ।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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