बोनसाई, जब कोई तुम्हारी जड़ों से, धीरे धीरे काटे तुम्हीं को, जब कोई तुम्हारी शाख से, धीरे...
साहित्य लहर
वर्तमान जीवन के यथार्थ को कैनवास पर चित्रित करती कहानियां, इसी प्रकार “पाप और पुण्य” शीर्षक कहानी...
मख़मली इश्क की क़ायनात “अहद-ए-वफ़ा”, ‘प्यार करते हो” उक्त प्रस्तुति में प्रेमिका कहती हैं की इनकार भले...
कविता : भ्रम टूट गया, अच्छा हुआ चलन नहीं रहा, अब किसी के विश्वास का, खुद के खुदा...
पुलकित तन को आनंदित करते “स्पंदन प्रेम के”… शब्दों की सुन्दरता हो या भावों का पैनापन दोनों...
लघुकथा : गलती का एहसास, कमरे की सारी अलमारियां किताबों से भरी पड़ी हैं सामान रखने के...
लघु कथा: मुंह दिखाई, वंदना के इतना कहते ही जानकी चाची चौंक कर बोली अरे क्या दे...
कविता : गर्मी ने ली अंगडाई, सर्दी आई… पंखे, कूलर व एसी बंद हुए, रजाई ने अपना...
पुस्तक समीक्षा : काव्य संग्रह ‘काव्यांचल’, कविता में देश समाज के प्रति जीवन का उद्गार सदियों से...
कविता : पत्थर, मेरे दर्द से तुझे न मतलब रहा, इंसान तू बहुत खुदगर्ज रहा, तू टुकड़े करता...














