February 9, 2026

साहित्य लहर

कविता : बातों में मत उलझाओ हमें, रखी है जो पोटली बांध कर। दर्द वह गंगा में अभी...
कविता : फूलों की माला, हंसता हुआ चेहरा तुम्हारा, चारों दिशाओं में अब यह आकाश भीगा, सारा सर्दी के...
मेरे विचार से ‘व्हाट्सप’… कुछ समूह का आनंद लिया, मैंने बहा बाते करके ही, कुछ में जाकर...
कविता : राह बदलना ही जरूरी था, उसके हर खेल में हारा, खेल को मिटा दिया मैंने…….!...
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