कविता : देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया

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कविता : देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया, देखकर इंसान को रब भी परेशान हो गया, इंसान का मान सम्मान कहीं खो गया, उसने तो रहने को बनाई थी एक धरती। पढ़ें मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से रचनाकार बंजारा महेश राठौर सोनू की कलम से…

देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया
लोग धोखा देकर सोचते हैं काम हो गया
मानो सच्चाई का अब कोई काम नहीं रहा
झूठ बोलने वालों का ऊंचा नाम हो गया
देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया

देखकर इंसान को रब भी परेशान हो गया
इंसान का मान सम्मान कहीं खो गया
उसने तो रहने को बनाई थी एक धरती
अब कहीं भारत कही पाकिस्तान हो गया
देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया

धरती माता का आंचल लहूलुहान हो गया
गोद में उसकी इंसान हिंदू मुसलमा हो गया
और कितना लिखे राठौर धर्म के बारे में
इंसान का धर्म पता नहीं कहां खो गया
देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया,


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कविता : देखो तो जमाना कितना बेईमान हो गया, देखकर इंसान को रब भी परेशान हो गया, इंसान का मान सम्मान कहीं खो गया, उसने तो रहने को बनाई थी एक धरती। पढ़ें मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से रचनाकार बंजारा महेश राठौर सोनू की कलम से...

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