हिंदी बोलने में हिचकिचाहट कैसी…

देश से बाहर जाने पर हिंदी भूलना जरूरी है क्या...?

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निक्की शर्मा

समय बदला , समाज बदला, नजरिया बदला लेकिन नहीं बदला हिंदी के प्रति लगाओ, विश्वास। हिंदी बोलेनें में हिचकिचाहट और शर्म।आखिर क्यों देश से बाहर जाने के बाद हिंदी बोलने में कठिनाई होती है। क्या मॉडर्न नहीं कहलाएगें लोग।

जो बातें हिंदी में हो सकती है वो तो कर ही सकते हैं हम आखिर सम्मान की बात है।हिंदी में कहना अपने देश को सामने रखना होगा। यह सोच फिर कब बदलेगी? हिंदी केवल एक भाषा नहीं एक सूत्र है जो पूरे समाज को कितने ही नगरों, महानगरों को जोड़ती है।

हिंदी हिंदुस्तान की भाषा है।हिंदी भारत देश की मातृभाषा है।अनेकता में एकता का स्वर हिंदी ही है, इसका सम्मान करना हम सब देशवासियों का कर्तव्य है। दुनिया भर में हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है लेकिन भारत देश की मातृभाषा हिंदी दिवस 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाते है।

14 सितंबर 1949 संविधान सभा में देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को अंग्रेजी के साथ आधिकारिक भाषा के तौर पर माना गया था,इसलिए हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं । यह फैसला प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिया था। हिंदी भाषा के महत्व को समझा और हिंदी दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया।

हिंदी एक ऐसी भाषा है जो सारे देश को एक सूत्र में बांधती हैं आज भी कई जगह इसका विरोध हो रहा है। आज भी हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा है।हिंदी के प्रति लोगों के  नजरिए को बदलने के लिए जन जागरूकता अभियान को बढ़ावा देना होगा। जन-जन तक हिंदी को पहुंचाने के लिए प्रचार करने की कोशिश तेज करनी होगी।

हिंदी के प्रयोग  को हर जगह बढ़ावा देना होगा। हिंदुस्तान से बाहर रहने वाले और भारतीय लोग हिंदी के सम्मान में बहुत तरह का आयोजन करते हैं ।एक दिन के आयोजन और सम्मान से क्या हिंदी की दशा सुधर जाएगी? नहीं… शायद नहीं।

हमें हिंदी भाषा को बढ़ावा देना होगा । कुछ लोग अंग्रेजी में लिखकर उसे हिंदी बोल देते हैं सरकारी कर्मचारी भी हिंदी की जगह अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करते हैं ।हर कार्यालय में ज्यादातर अंग्रेजी में ही काम होता है।अंग्रेजी भाषा का उपयोग ही हर जगह होता है। अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कार्यालय में हर जगह है।

हिंदी दिवस मनाने से क्या होगा कुछ नहीं जब तक हम पुरी तरह इसे उपेक्षा से बाहर न निकाल लें। हिंदी दिवस मनाने के साथ यह प्रण लेना होगा सभी को ज्यादा जागरूक करना होगा ज्यादा से ज्यादा काम हम हिंदी में करें तभी इसे बढ़ावा मिलेगा।

हिंदी में अपनत्व की भावना को बढ़ाना होगा,हिंदी दिवस के रूप में एक दिन मनाने से हिंदी जो अभी भी उपेक्षित  का शिकार है कई जगह विरोध होता आया है धीरे-धीरे शायद सम्मान अपनत्व पूरी तरह मिल जाए।

हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार इस के सम्मान में हिंदी दिवस के अवसर पर हम सभी ये प्रण लें ज्यादा से ज्यादा काम हम हिंदी में करें।हिंदी भाषा और संस्कृति को जानने के लिए विदेशों से लोग हमारे देश का रूख कर रहे हैं और अपने ही देश में हिंदी उपेक्षा का शिकार है।

हिंदी का सम्मान और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हम सब हिंदी दिवस पर इसबार ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करें। हिंदी को उपेक्षा से बचाएं, हम सब को एक सूत्र से बांधती है उस सूत्र को मजबूत बनाएं।


¤  प्रकाशन परिचय  ¤

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From »

निक्की शर्मा ‘रश्मि’

लेखिका एवं कवयित्री

Address »
मीरा रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र)

Publisher »
देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड)

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