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कविता : मेरा भाई मेरा अभिमान… मेरे घर-आंगन की है शान सबसे अलग उसकी पहचान मेरा भाई मेरा अभिमान। लड़ते-झगड़ते आपस में हम पर करते एक-दूजे से प्यार मेरा भाई मेरा अभिमान। रौशन जिससे मेरा घर-द्वार… #सुनील कुमार, बहराइच, उत्तर प्रदेश
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खुशियों के खातिर हमारी
खुशियां अपनी देता त्याग
मेरा भाई मेरा अभिमान।
रक्षा करता बनकर ढाल
मुझ पर करता जां निसार
मेरा भाई मेरा अभिमान।
खुद से ज्यादा रखता मेरा ध्यान
मेरे सुख – दु:ख में आता काम
मेरा भाई मेरा अभिमान।
मेरे घर-आंगन की है शान
सबसे अलग उसकी पहचान
मेरा भाई मेरा अभिमान।
लड़ते-झगड़ते आपस में हम
पर करते एक-दूजे से प्यार
मेरा भाई मेरा अभिमान।
रौशन जिससे मेरा घर-द्वार
ईश्वर का है अनुपम वरदान
मेरा भाई मेरा अभिमान।
हिमालय की संस्कृति और पहचानों को सहेजता ‘साई सृजन पटल’ का नया अंक









