
यह कविता Rabindranath Tagore के साहित्य, संगीत, समाज सुधार और राष्ट्रनिर्माण में योगदान को समर्पित है। कवि ने उनके सादा जीवन, नोबेल पुरस्कार, राष्ट्रगान रचना और बहुआयामी व्यक्तित्व का भावपूर्ण वर्णन किया है।
- गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को नमन
- नोबेल विजेता साहित्य सम्राट
- जन-गण-मन के रचनाकार
- साहित्य और संगीत के महागुरु
सैनिक की कलम
गणपत लाल उदय, अजमेर, राजस्थान
गुरुदेव सादा जीवन जीने वाले,
नोबेल पुरस्कार आप पाने वाले।
रविंद्रनाथ टैगोर आप थे हमारे,
साहित्य किंग जो कहलाने वाले।।
महान शख्सियत और रचनाकार,
ब्रह्म समाज दार्शनिक चित्रकार।
आध्यात्मिक एवं मर्यादा ज्ञाता,
समाज सुधारक एवं संगीतकार।।
धर्मपरायण 13 बच्चों की माता,
महान थीं देवी शारदा गुरु माता।
ब्रह्म समाज के पिता वरिष्ठ नेता,
साहित्य जग की आप परिभाषा।।
8 वर्ष में ही आप रचना रच दिए,
मृणालिनी देवी संग विवाह किए।
साहित्य से सभी के दिल हैं जीते,
राष्ट्रगान “जन गण मन” लिख दिए।।
Bangladesh का ऐसा राष्ट्रगान लिखे,
Japan, United States में पहचान बने।
Sri Lanka राष्ट्रगान पर कलम चली,
कविताएं प्रकाशित, पुस्तकें छापीं।।
कई लघुकथाएं, रचना-संग्रह लिखे,
अनेकों कहानियां, उपन्यास लिखे।
गुरु कबीर रामप्रसाद सैन से सीखे,
रीति-रिवाजों के नकारात्मक पक्ष लिखे।।







