
यह कविता आधुनिक युवाओं की तनावपूर्ण जीवनशैली, फैशन और मोबाइल की लत पर चिंता व्यक्त करती है। कवि ने युवाओं को अनुशासित दिनचर्या, स्वास्थ्य और आत्मनिर्माण की ओर प्रेरित करते हुए समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया है।
- युवा और बदलती जीवनशैली
- रीलों में खोता भविष्य
- जागो युवा, समय पुकार रहा
- तनाव में घिरा आधुनिक युवा
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
आजकल का युवा
तनावग्रस्त होकर
खीज और कुढ़न में जी रहा है।
फैशनपरस्ती में फंसकर
सिर के बालों में नए-नए आकार दे रहा है।
कानों में बाली, हाथों में कड़ा डाले
और मुंह में गुटखा दबाए
भविष्य की परवाह किए बगैर
फोन स्क्रीन पर रील बस रील देख रहा है।
आजकल के युवा को
न देश की चिंता,
न समाज की चिंता,
न स्वयं के भविष्य की चिंता।
बहुत ही भयावह स्थिति में जी रहा है
आज का युवा।
जीवन निर्माण महत्वपूर्ण है।
जाग युवा—
आदर्श दिनचर्या अपनाकर
सही समय पर सोना और जागना,
व्यायाम, आसन, प्राणायाम, सैर,
स्वास्थ्यवर्धक भोजन कल्याणकारी है
देश, समाज और स्वयं के लिए।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गूजर,
Fatehabad, Agra, Uttar Pradesh – 283111
9627912535







