
यह कविता जीवन के कठिन दौर, विश्वासघात और मानसिक संघर्ष के बीच भी हार न मानने का संदेश देती है। कवि मौन, धैर्य और आत्मबल के सहारे हर परिस्थिति का सामना करते हुए जीने की प्रेरणा देता है।
- संघर्ष के बीच जीने का संकल्प
- मौन की शक्ति
- टूटकर भी जीने की जिद
- अंधकार से उजाले तक
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
मेरा मन डूब रहा है
अनजाने अंधकार में।
मेरी सारी कोशिशें,
मेरे सारे प्रयास
बेकार हो रहे हैं।
टूट रहा है बार-बार
मनोबल!
सांसारिक आघात,
अपनों का दगा
जब मिलता है,
बड़े-बड़े योद्धा
धराशायी हो जाते हैं।
लेकिन मुझे
उबरना है।
इस कठिन दौर से गुजरकर
बाहर निकलना है।
सीने का दर्द
सीने में ही सहना है…
मौन रहकर
मुकाबला करना है
अपने हालातों से।
मुझे जीना है,
मर-मर कर ही सही,
खुद को खुद ही समझाना है।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली,
डाकघर तारौली गूजर,
फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश – 283111
मोबाइल: 9627912535









